MUZAFFARPUR

बृज बिहारी प्रसाद ह’त्याकांड, मुन्ना शुक्ला को सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत

सुप्रीम कोर्ट ने 1998 में पटना में पूर्व आरजेडी मंत्री बृज बिहारी प्रसाद की हत्या के लिए अपराधी से राजनेता बने विजय कुमार शुक्ला उर्फ मुन्ना शुक्ला को सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी है.

पूर्व मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति संजय कुमार और आर महादेवन की पीठ ने मुन्ना शुक्ला और एक सह-दोषी की याचिकाओं को खारिज कर दिया. जिसमें शीर्ष अदालत के अक्टूबर 2024 के फैसले की समीक्षा की मांग की गई थी.

मुन्ना शुक्ला ने अधिवक्ता नमित सक्सेना के माध्यम से पुनर्विचार याचिका दायर की थी. फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से उन्हें राहत नहीं मिली है. बता दें कि पिछले साल 3 अक्टूबर को अदालत ने मुन्ना शुक्ला और मंटू तिवारी को इस मामले में दोषी ठहराया था.

उच्चतम अदालत ने पटना उच्च न्यायालय के उस फैसले को आंशिक रूप से खारिज कर दिया था, जिसमें सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया था. इसमें पूर्व विधायक शुक्ला और मंटू तिवारी को आजीवन कारावास की सजा भुगतने के लिए 15 दिनों के भीतर आत्मसमर्पण करने को कहा गया था.

शीर्ष अदालत ने पूर्व सांसद सूरजभान सिंह सहित पांच अन्य आरोपियों को संदेह का लाभ दिया और उनको बरी करने के फैसले को बरकरार रखा.

बृज बिहारी प्रसाद हत्याकांड

बता दें कि पूर्व भाजपा सांसद रमा देवी के पति और प्रभावशाली ओबीसी नेता बृज बिहारी प्रसाद की हत्या कर दी गई थी. गोरखपुर के गैंगस्टर श्रीप्रकाश शुक्ला द्वारा हत्या की गई थी. जिसके बाद उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने हमलावर श्रीप्रकाश शुक्ला को एनकाउंटर में मार गिराया था.

शीर्ष अदालत ने कहा था, “बृज बिहारी प्रसाद और लक्ष्मेश्वर साहू (प्रसाद के अंगरक्षक) की हत्या के लिए मंटू तिवारी और विजय कुमार शुक्ला उर्फ मुन्ना शुक्ला के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 (हत्या) के तहत आरोप साबित हो चुके हैं”

मंत्री को गोलियों से किया गया था छलनी

13 जून 1998 को बृज बिहारी प्रसाद आईजीआईएमएस परिसर में टहल रहे थे. बॉडीगार्ड भी उनके साथ था. तभी अचानक एक एंबेसडर और एक सूमो उनके पास पहुंचा. गर्दनीबाग थाना (अब शास्त्रीनगर) कांड संख्या 336/98 में दर्ज FIR में लिखा गया है कि मंटू तिवारी, भूपेंद्र नाथ दुबे, श्रीप्रकाश शुक्ला सहित कई लोग बृजबिहारी प्रसाद और बॉडीगार्ड के पास आ गए.

पहले भूपेंद्र नाथ दुबे ने गोली चलाई. उसके बाद मंटू तिवारी ने स्टेनगन से गोली चलानी शुरू कर दी. श्रीप्रकाश शुक्ला ने भी पिस्टल से अंधाधुंध फायरिंग की. उस समय बृज बिहारी प्रसाद और उनके बॉडीगार्ड वहीं गिर गए और उनकी जान चली गई.

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