मुजफ्फरपुर: फूले अम्बेडकर संघर्ष मोर्चा ने अपने जिला सह-संयोजक फहद जमा के आवास पर एक संवाददाता सम्मेलन आयोजित किया।

सम्मेलन में वक्फ कानून की वापसी, पहलगांव हत्याकांड, और 26 अप्रैल को प्रस्तावित वक्फ बचाओ-संविधान बचाओ जुलूस पर विस्तृत चर्चा हुई।

मोर्चा के संयोजक सूरज कुमार सिंह ने पहलगांव हत्याकांड की कठोर निंदा करते हुए गृहमंत्री अमित शाह से इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा, “इस हत्याकांड की गहन जांच होनी चाहिए।

देश को बताया जाए कि 7 लाख फौज और इंटेलिजेंस कहां थी? वक्फ कानून संविधान के मूल भावना पर हमला है। इसके खिलाफ 26 अप्रैल को विशाल जुलूस निकाला जाएगा, जिसमें नागरिक समाज हिस्सा लेगा।

वहीं सह-संयोजक फहद जमा ने बताया कि 26 अप्रैल के जुलूस की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। जुमे की नमाज के बाद मस्जिदों में ऐलान, नुक्कड़ सभाएं, और मुहल्ला बैठकों का आयोजन किया जा रहा है।

मुजफ्फरपुर का नागरिक समाज और मुस्लिम संगठन एकजुट हैं। जुलूस शहर के विभिन्न हिस्सों से निकलकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचेगा, जहां राष्ट्रपति के नाम मांग पत्र सौंपा जाएगा।”

मोर्चा के तौशिफ आलम ने कहा, “वक्फ कानून मोदी सरकार की ध्रुवीकरण की साजिश है। बिहार में भाजपा की यह चाल नाकाम होगी। लोकतंत्र और संविधान के समर्थक इस काले कानून के खिलाफ डटकर मुकाबला करेंगे।”

शाहनवाज हुसैन उर्फ नौशाद ने आरोप लगाया, “वक्फ कानून के जरिए सरकार पूंजीपति मित्रों को वक्फ की जमीन सौंपना चाहती है। यदि अभी विरोध नहीं हुआ, तो मंदिर, चर्च, और गुरुद्वारों की जमीनें भी बेची जाएंगी।”

मुफ्ती ज्याउल मुस्तफा कादरी ने कहा, “पहलगांव में मुसलमानों ने साझी संस्कृति की मिसाल पेश की, जो मोदी सरकार की नफरत की राजनीति को चुनौती देती है।

वहीं, मुफ्ती मोहम्मद शमीम ने 26 अप्रैल के जुलूस को ऐतिहासिक बताते हुए कहा, “लोगों का गुस्सा सड़कों पर दिखेगा। संविधान नहीं बचा, तो देश नहीं बचेगा।”




Leave a Reply