नवादा के दृष्टिबाधित छात्र रवि ने रचा इतिहास, BPSC के बाद UPSC पास, होने के बाद गुलदस्ता लेकर डीएम खुद ही पहुंच गए हैं और परिवार के लोगों से मुलाकात किया और रवि राज से मुलाकात करते हुए नवादा के डीएम रवि प्रकाश के द्वारा उन्हें खूब बधाई व शुभकामना दिया गया और साथ ही मिठाई भी खिलाया गया है। खान सर भी हुए फैन।

कहते हैं जिनके इरादे मजबूत और लगन सच्ची होती है वो अपनी असीम क्षमताओं और अद्वितीय प्रतिभा के बल पर किसी भी चुनौती को पार कर सकते हैं। ऐसी ही कहानी है बिहार के नवादा के रहने वाले दृष्टिबाधित छात्र रवि राज की। रवि राज ने बीपीएससी 69वीं परीक्षा में रैंक 1 हासिल किया है। यही नहीं उन्होंने यूपीएससी सिविल सिविल सर्विस जैसी कठिन परीक्षा भी पास कर ली है।

बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन की तरफ से BPSC 69वीं परीक्षा का फाइनल रिजल्ट जारी हुआ। इस परीक्षा में दृष्टिबाधित वर्ग में रैंक 1 लाकर रवि राज ने रेवेन्यू ऑफिसर पद पर सफलता हासिल की है।रवि राज बिहार के नवादा शहर के रहने वाले हैं। उन्होंने मिर्जापुर के ऑक्सफॉर्ड पब्लिक स्कूल से 10वीं तक की पढ़ाई की है। इसके बाद 12वीं की परीक्षा बिहार के नवादा के एसएन इंटर कॉलेज से पास की है।

परीक्षा में मां करती थी राइटिंग का काम
रवि राज ने नवादा के एसआरएस कॉलेज से साल 2021 में राजनीतिक विज्ञान से ग्रेजुएशन पूरा किया है। इसके बाद वो सिविल सर्विस की तैयारी में लग गए। उन्होंने शुरू से यूपीएससी परीक्षा पर ही फोकस किया है।रवि राज के पिता एक किसान हैं।

वहीं, उनकी मां ने उन्हें पढ़ाई करने में काफी मदद की। रवि बताते हैं कि उनकी मां ही हर सब्जेक्ट को पढ़ती थीं और वो सुनकर एग्जाम की तैयारी करते थें। उनकी मां ने उनके लिए परीक्षा में राइटर का काम भी किया है। रवि राज ने तीसरी प्रयास में BPSC 69वीं परीक्षा को ओवर ऑल कैटेगरी में रैंक 490 और दृष्टिबाधित वर्ग में रैंक 1 लाकर क्रैक किया।

इसके अलावा उन्होंने इस साल UPSC मेन्स एग्जाम को भी क्रैक कर लिया है। पटना के खान सर ने भी रवि राज के हौसले की तारीफ की है। आपको बता दे कि रवि राज अकबरपुर प्रखंड के महुली गांव के रहने वाले हैं। और चौथा स्टांप में सफल हासिल किया है।

परिवार के लोगों में खुशी का माहौल है। माता-पिता का हर सपना पूरा हो गया है। रवि राज ने कहा कि मेरी सपना थी और यह सपना पूरा हो गई है। आगे मैं इस देश का सेवा करूंगा। 8 से 10 घंटा लगातार में पढ़ाई करता था। और इसी पढ़ाई के साथ ही मेरे इस पढ़ाई में माता-पिता का बहुत बड़ा योगदान है जिसके कारण मैं इतनी बड़े मुकाम हासिल किया हूं।



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