पटना: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फिर बिहार दौरे पर आ रहे हैं. वह 24 अप्रैल को मधुबनी में कई योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे. सरकारी कार्यक्रमों के साथ-साथ वह चुनावी सभा को भी संबोधित करेंगे. पीएम मोदी की रैली को बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के प्रचार अभियान की शुरुआत भी करेंगे. न केवल एनडीए, बल्कि महागठबंधन की भी मिथिलांचल पर नजर है. तेजस्वी यादव भी पिछले दिनों मिथिला का दौरा किया था. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर क्यों दोनों गठबंधनों के लिए मिथिलांचल इतना महत्वपूर्ण है?

क्यों जरूरी है मिथिलांचल?
जानकार कहते हैं कि पिछले विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव में मिथिलांचल में महागठबंधन को जबर्दस्त हार का सामना करना पड़ा था, जबकि एनडीए विशेषकर बीजेपी को शानदार कामयाबी मिली थी.

लिहाजा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली की बदौलत इस वोटबैंक को इंटेक्ट रखते हुए नए मतदाताओं को जोड़ना भी लक्ष्य होगा. यह चुनावी शंखनाद तो होगा ही, एनडीए का शक्ति प्रदर्शन भी होगा. यही वजह है कि बीजेपी के साथ-साथ तमाम घटक दल भी भीड़ जुटाने के लिए पसीना बहा रहे हैं.

मिथिलांचल में करीब 100 सीटें
मिथिलांचल और उत्तर बिहार की करीब 100 विधानसभा सीटें इस क्षेत्र में आती है. कहते हैं कि इस इलाके में जीत हासिल करने वाला ही बिहार की सत्ता पर राज करता है. पिछली बार तेजस्वी यादव की अगुवाई में महागठबंधन ने एनडीए को कड़ी चुनौती दी थी लेकिन इसी क्षेत्र में वह काफी पीछे रह गए. जिस वजह से वह सत्ता में नहीं आ पाए. वहीं बीजेपी और जेडीयू ने शानदार कामयाबी हासिल करते हुए सत्ता में वापसी की.

2020 में एनडीए की दबदबा
मधुबनी, दरभंगा, समस्तीपुर. मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर, सहरसा, मधेपुरा, सुपौल, अररिया, पूर्णिया, कटिहार और खगड़िया जिले में 85 विधानसभा सीट हैं. 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए को जहां 58 सीटों पर जीत मिली, वहीं महागठबंधन को मात्र 26 सीटों से संतोष करना पड़ा. एक सीट पर एआईएमआईएम के खाते में गई थी.

2024 में एनडीए की एकतरफा जीत
लोकसभा चुनाव 2024 में भी एनडीए की एकतरफा जीत हुई है. मिथिलांचल में आरजेडी का खाता भी नहीं खुला, जबकि कांग्रेस सिर्फ कटिहार सीट ही जीत पाई. वहीं पूर्णिया में निर्दलीय पप्पू यादव को विजय मिली.

बीजेपी ने जहां मधुबनी, दरभंगा, उजियारपुर, मुजफ्फरपुर और अररिया में जीती, वहीं झंझारपुर, सीतामढ़ी, शिवहर, मधेपुरा और सुपौल में जेडीयू को विजय मिली. समस्तीपुर (सुरक्षित) और खगड़िया में चिराग पासवान की एलजेपीआर को सफलता मिली.




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