MUZAFFARPUR

‘एक महीने में 50 लाख महादलित परिवार को जमीन नहीं मिली तो..’ नीतीश सरकार को प्रशांत किशोर का अल्टीमेटम

पटना: जैसे-जैसे बिहार विधानसभा चुनाव पास आ रहा है, वैसे-वैसे विपक्षी दलों के तेवर सरकार के खिलाफ तल्ख होते जा रहे हैं. जन सुराज पार्टी ने जनहित से जुड़ी मांगों को लेकर जन आंदोलन करने का ऐलान किया है.

आज पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने कहा कि जातीय जनगणना, महादलितों को जमीन और भूमि सर्वे के नाम पर मची लूटपाट को लेकर हमलोग सरकार के खिलाफ आंदोलन चलाएंगे.

जातीय जनगणना पर घेरा

प्रशांत किशोर ने कहा कि हमारी पहली मांग जातीय जनगणना के आधार पर आरक्षण की सीमा बढ़ाने की है. अब तक क्यों नहीं यह बढ़ा? उन्होंने कहा कि जातीय जनगणना के जरिए नीतीश कुमार और तेतस्वी यादव ने राजनीतिक रोटी सेंकने की कोशिश की है. जनगणना सर्वें में सरकार ने माना कि 34 फीसदी से ज्यादा लोग बिहार में गरीबी रेखा से नीचे हैं.

हालांकि ये महत्वपूर्ण आंकड़ा नहीं है. महत्वपूर्ण बात ये है कि 5% से भी कम लोग 12वीं क्लास पास करते हैं. आरक्षण की लड़ाई लड़ने की बात करने वाले लोग 35 साल के बाद भी 0.93% अति पिछड़ा समाज के लोग ही आज सरकारी नौकरियों में हैं.

तीन डिसमिल जमीन का क्या हुआ?

जन सुराज पार्टी के सूत्रधार ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2006 में महादलित विकास मिशन बनाया था. इस समाज को तीन डिसमिल जमीन देने का वादा किया था. 234000 परिवार को ही अब तक तीन डिसमिल जमीन दी गई है.

उन्होंने कहा कि देशपाल कमेटी की रिपोर्ट में बताया गया है कि 123000 परिवार ऐसे हैं, जिन्हें जमीन तो दी गई है लेकिन अब तक कब्जा नहीं मिला. वहीं, 50 लाख से अधिक दलित परिवारों को योजना का लाभ मिलना चाहिए था.

भूमि सर्वे का नाम पर लूटपाट

प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार में 80% जमीन का अब तक डिजिटाइजेशन नहीं हुआ है. परिवार के बीच लड़ाई लग गई है. जितनी हत्या की घटना बिहार में हुई है, उसमें 60% मामला जमीन से जुड़ा हुआ है. सर्वे के नाम पर हजारों-करोड़ों रुपये लूटे जा रहे हैं. सीओ और डीसीएलआर की पोस्टिंग में 25 से 50 लाख रुपये लिए जा रहे हैं. ऐसे में सरकार को श्वेत पत्र जारी कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए.

सरकार को 30 दिन का अल्टीमेटम

प्रशांत किशोर ने कहा कि उनकी पार्टी नीतीश सरकार को एक महीने का समय दे रही है. उसके बाद हमलोग बिहार के 40000 गांव में जाकर बैठक करेंगे और उसके बाद हस्ताक्षर अभियान चलाएंगे. हस्ताक्षर अभियान चलाने के बाद एक करोड़ लोगों के हस्ताक्षर हम मुख्यमंत्री और राज्यपाल को सौंपेंगे. उसके बाद विधानसभा का घेराव भी करेंगे.

 

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