MUZAFFARPUR

चिराग ने दिखाया चाचा पशुपति पारस को NDA से बाहर होने का रास्ता, अब ‘लालटेन’ के सहारे पूरी करेंगे सियासी सफ़र

पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति पारस और उनकी पार्टी रालोजपा(राष्ट्रीय लोकजनशक्ति पार्टी) ने एनडीए से सभी रिश्ते खत्म करने की घोषणा कर दी है। लोकसभा चुनाव में सीट नहीं मिलने से पशुपति पारस नाराज चल रहे थे। लेकिन अभी तक उन्होंने एनडीए से अपने रिश्तों को खत्म करने की घोषणा नहीं की थी।

पटना के बापू सभागार में सोमवार को अंबेडकर जयंती पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पशुपति पारस ने एनडीए की सरकार को दलित विरोधी और भ्रष्टाचारी बताया। उन्होंने कहा कि अब हम अपनी पार्टी और संगठन को मजबूत करने के लिए काम करेंगे। साथ ही जहां हमें उचित सम्मान दिया जाएगा, हम उन्हीं लोगों के साथ जाएंगे।

हालाँकि पशुपति कुमार पारस के एनडीए से बाहर होने की पटकथा एक साल पहले ही लिखी जा चुकी थी। जब देश में लोकसभा के चुनाव होने जा रहे थे। पशुपति पारस अंतिम क्षण तक सीट शेयरिंग में अपनी भूमिका का इन्तजार करते रहे। लेकिन एनडीए गठबंधन में उन्हें निराशा हाथ लगी। लोकसभा चुनाव में लड़ने के लिए उन्हें एक भी सीट नहीं दी गयी। हालाँकि पारस मन मसोस कर रहे गए। इसके बाद भी उन्हें इंतजार था की यदि लोकसभा चुनाव में उनके भतीजे चिराग को असफलता मिलेगी तो एनडीए में उनकी भूमिका बच जाएगी।

लेकिन 2024 में लोकसभा चुनाव का परिणाम उनके आशा के विपरीत आया। भतीजे चिराग की पार्टी लोजपा(रामविलास) ने बिहार की 5 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ा और पाँचों पर जीत हासिल की। इस तरह चुनाव में उनका स्ट्राइक रेट 100 फीसदी रहा। इसके बाद चिराग का कद एनडीए में और बढ़ गया। केंद्र सरकार में चिराग पासवान को पहली बार मंत्री बनाया गया। जिस विभाग के उनके पिता चिराग पासवान कभी मंत्री रह चुके थे।

उधर एनडीए में तव्वजो नहीं मिलने से पशुपति पारस नए ठिकाने की तलाश में जुट गए। कभी दही चुडा भोज तो कभी इफ्तार के बहाने लालू यादव से उनकी मुलाकात होने लगी। हालाँकि उनकी कभी सियासी बातचीत नहीं हुई।

लेकिन आगामी बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर उनपर दवाब बढ़ने लगा। पार्टी को बचना उनकी मज़बूरी बन चुकी है। ऐसे में कई महीनों के इन्तजार के बाद पशुपति पारस ने एनडीए से नाता तोड़ने का ऐलान कर दिया।

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