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बिहार सरकार का बड़ा फैसला, अब सीएचसी में भी आंख, नाक, कान और गले का होगा इलाज

बिहार : स्वास्थ्य सुविधा में क्रांतिकारी बदलाव करते हुए राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इस निर्णय के अनुसार अब प्रखंड स्तरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) पर नेत्र और नाक-कान-गला (ईएनटी) रोग विशेषज्ञों की तैनाती होगी। इसके लिए सरकार की ओर से सभी सीएचसी पर दो-दो के हिसाब से कुल 1080 अतिरिक्त  पद सृजित किए गए हैं। इन पदों पर जल्द ही उपरोक्त विशेषज्ञ चिकित्सा पदाधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी।

प्रखंड अस्पतालों में अब मिलेंगे नेत्र और ईएनटी विशेषज्ञ    

यह महत्वपूर्ण पहल सात निश्चय-3 के तहत ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में सरकार की ओर से की गई है। सरकार के विशेष सचिव की ओर से महालेखाकार को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि भारतीय लोक स्वास्थ्य मानक (आईपीएचएस) के अनुसार सभी सीएचसी पर जनरल सर्जन,  फिजिशियन,  स्त्री, शिशु रोग विशेषज्ञ के साथ मूर्छक (एनेस्थेटिस्ट) जैसे महत्वपूर्ण पद पहले से सृजित हैं।

अतिरिक्त पदों का सृजन

राज्य के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को विशिष्ट चिकित्सा केंद्र (स्पेशियलिटी हॉस्पिटल) बनाने की दिशा में ईएनटी और नेत्र रोग विशेषज्ञ के लिए 2-2 अतिरिक्त पद सृजित किए गए हैं। यह सभी पद राज्य के 534 सीएचसी के साथ छह अन्य सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए सृजित हैं।

इसके आलोक में प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र पर एक नेत्र रोग विशेषज्ञ और एक ईएनटी विशेषज्ञ की तैनाती होगी। इस तरीके से पूरे राज्य भर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को मिलाकर कुल 540 नेत्र रोग और 540 ईएनटी के विशेषज्ञों की नियुक्ति की जाएगी। इस मद में एक सौ 55 करोड़ छह लाख नवासी हजार 920 रुपए वार्षिक व्यय किया जाएगा।

ग्रामीणों का स्थानीय स्तर पर होगा गुणवत्तापूर्ण इलाज

सरकार और स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारियों का मानना है कि प्रखंड स्तर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को विशिष्ट चिकित्सा केंद्र बनाने से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा। मरीजों को आंख, कान, नाक और गला से संबंधित किसी भी रोग के इलाज के लिए जिला मुख्यालय तक की दौड़-भाग से छुटकारा मिलेगा। इससे ग्रामीणों की आर्थिक और समय की बचत होगी। बीमारी का स्थानीय स्तर पर तत्काल रूप में इलाज का लाभ प्राप्त होगा।

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