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पटना: नीट छात्रा के कमरे में कौन गया, दौस्त कौन हैं.., CBI ने हॉस्टल संचालिका और वार्डन से पूछे सवाल

पटना: पटना में नीट की तैयारी करने वाली जहानाबाद की छात्रा की मौत की जांच कर रही सीबीआई ने सोमवार को शंभू गर्ल्स हॉस्टल की संचालिका नीलम अग्रवाल और दो वार्डेन से तीन घंटे तक पूछताछ की। तीनों को लेकर सीबीआई दोपहर बाद हॉस्टल पहुंची थी। घटना की कई बिंदुओं पर उनसे जानकारी ली गई। संचालिका ने उस दिन की घटना के बारे में सीबीआई को विस्तार से जानकारी दी। सूत्रों के मुताबिक संचालिका और दो वार्डेन द्वारा दी गई जानकारी और अबतक जुटाए गए साक्ष्यों का सीबीआई मिलान कर रही है।

छह जनवरी को शंभू गर्ल्स हॉस्टल में छात्रा बेहोशी की हालत में मिली थी। सूत्रों का कहना है कि सीबीआई हॉस्टल संचालिका से पूछा कि घटना के दिन क्या वह वहां मौजूद थीं। सबसे पहले उन्हें किसने सूचना दी कि छात्रा अपने कमरे में बेहोशी की हालत में है। सूचना मिलने के बाद उन्होंने क्या किया। सबसे पहले जो छात्रा को उठाकर हॉस्टल से ले गया, क्या उसने उसके कहने पर ऐसा किया। इन सभी बातों की जानकारी संचालिका से सीबीआई ने ली।

दो वार्डेन को भी पूछताछ के लिए बुलाया गया था। सीबीआई जानना चाहती थी कि पांच जनवरी को जब छात्रा अपने घर जहानाबाद से आई थी तो क्या वह उन दोनों से मिली थी। छात्रा की मन:स्थिति क्या थी, क्या वह तनाव में थी। रात को उसने खाना खाया या नहीं, उसके कमरे में पांच और छह जनवरी को कौन-कौन गया था। हॉस्टल में रहने वाले उसके करीबी दोस्तों में कौन कौन हैं, जिससे वह अक्सर बात करती थी। बता दें कि बिहार की राजधानी पटना में नीट की तैयारी कर रही छात्रा की कथित यौन उत्पीड़न और हत्या के मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने औपचारिक रूप से इसी महीने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी।

जहानाबाद जिले की रहने वाली नीट अभ्यर्थी छह जनवरी को राजधानी पटना के चित्रगुप्त नगर थाना क्षेत्र स्थित एक निजी गर्ल्स हॉस्टल के कमरे में अचेत अवस्था में मिली थी। वह मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिये पटना में रहकर कोचिंग कर रही थी। गंभीर हालत में उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 11 जनवरी को उसकी मौत हो गई।

परिजनों ने शुरुआत से ही छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। मामले की जांच के लिये पहले विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया और केंद्रीय रेंज के पुलिस महानिरीक्षक जितेंद्र सिंह राणा को इसकी निगरानी सौंपी गई। साथ ही राज्य के अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) को भी जिला पुलिस की सहायता के लिये लगाया गया। बाद में पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर सीआईडी ने औपचारिक रूप से जांच अपने हाथ में ले ली थी।

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