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वीकेंड पर पटना जू में टूटा रिकॉर्ड, एक ही दिन में 19,378 आगंतुक, साल का दूसरा सबसे बड़ा रिकॉर्ड कायम

पटना : राजधानी पटना के दिल में बसे संजय गांधी जैविक उद्यान यानी पटना जू ने इस वीकेंड एक नया इतिहास रच दिया। इतवार के दिन यहां सैलानियों का ऐसा हुजूम उमड़ा कि एक ही रोज़ में 19,378 आगंतुकों ने दाख़़िला लिया। यह आंकड़ा 1 जनवरी के बाद इस साल का दूसरा सबसे बड़ा दैनिक रिकॉर्ड बन गया। इससे पहले नववर्ष के मौके पर सबसे ज्यादा भीड़ दर्ज की गई थी, मगर इस बार भी जू की रौनक देखते ही बनती थी।

आंकड़ों के मुताबिक 11,879 व्यस्क, 1,421 बच्चे, 08 दिव्यांग आगंतुक, 4,102 व्यस्क ग्रुप और 1,968 बच्चों के ग्रुप ने जू का दीदार किया। इसके अलावा 1,107 लोग थ्री-डी थिएटर पहुंचे, जिनमें 879 व्यस्क और 228 बच्चे शामिल थे। बच्चों के लिए प्रवेश मुफ़्त रहा, जिससे उनके चेहरों पर मुस्कान और भी गहरी दिखी।

वीकेंड की छुट्टी और खुशनुमा मौसम ने परिवारों, तलबा-ओ-तालिबात और प्रकृति प्रेमियों को जू की तरफ़ खींच लिया। हर ओर चहल-पहल, बच्चों की खिलखिलाहट और कैमरों की चमक दिखाई दी। जू प्रशासन का कहना है कि बढ़ती तादाद इस बात की दलील है कि लोगों में वन्यजीव संरक्षण के प्रति शऊर और दिलचस्पी बढ़ रही है। साथ ही यह जू की मक़बूलियत और अहमियत को भी उजागर करता है।

करीब 153 हेक्टेयर रकबे में फैला यह उद्यान मुल्क के प्रमुख जैविक उद्यानों में चौथे मुकाम पर शुमार होता है। यहां 93 प्रजातियों के लगभग 1100 से ज्यादा वन्यजीव आबाद हैं—शेर की दहाड़, बाघ की शान, तेंदुए की फुर्ती, भालू की अदा, दरियाई घोड़े की मस्ती और हाथियों की गरिमा सैलानियों को मंत्रमुग्ध कर देती है। मगरमच्छ, हिरणों की विभिन्न नस्लें और रंग-बिरंगे परिंदे इस नज़ारे को और भी बना देते हैं।
वनस्पति विविधता भी कम नहीं। 800 से अधिक पौधों की किस्में औषधीय, सजावटी, छायादार और दुर्लभ दरख़्त यहां महफ़ूज़ और विकसित किए गए हैं। जल उद्यान का उन्नयन, नेचर एजुकेशन लाइब्रेरी, कैफेटेरिया और बोटिंग जैसी सहूलियतें इस जगह को महज़ जू नहीं, बल्कि तफ़रीह और तालीम का मुकम्मल मरकज़ बना देती हैं।

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