BIHARSTATE

मोकामा सीट पर बाहुबलियों की जंग, तेजस्वी के लिए अनंत का किला भेदने उतरेंगे सूरजभान सिंह!

पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में मोकामा सीट एक बार फिर सुर्खियों में है. इस सीट पर दो बाहुबलियों, अनंत सिंह और सूरजभान सिंह, के बीच कांटे की टक्कर की संभावना ने पूरे बिहार की नजरें इस ओर खींच ली हैं.

मोकामा, जो हमेशा से सियासी और सामाजिक चर्चाओं का केंद्र रहा है, इस बार भी अपनी ‘हॉट सीट’ की छवि को बरकरार रखने को तैयार है. अनंत सिंह जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के टिकट पर मैदान में उतर रहे हैं, जबकि सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी के राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के बैनर तले चुनाव लड़ने की चर्चा जोरों पर है.

अनंत सिंह का अजेय किला

मोकामा में अनंत सिंह का दबदबा किसी से छिपा नहीं है. ‘छोटे सरकार’ के नाम से मशहूर अनंत सिंह ने इस सीट पर अपनी बादशाहत कायम रखी है. 2005, 2010, 2015 और 2020 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने जीत का परचम लहराया. 2022 के उपचुनाव में उनकी पत्नी नीलम देवी ने भी आरजेडी के टिकट पर जीत हासिल की थी. हालांकि, 2024 में नीलम देवी ने पाला बदलकर जेडीयू का दामन थाम लिया और लोकसभा चुनाव में ललन सिंह के लिए प्रचार किया.

मोकामा का सियासी इतिहास

मोकामा विधानसभा सीट का इतिहास रोचक रहा है. 2000 में सूरजभान सिंह ने अनंत सिंह के बड़े भाई और तत्कालीन मंत्री दिलीप सिंह को हराकर इस सीट पर कब्जा जमाया था. इसके बाद 2004 में वह बलिया लोकसभा सीट से सांसद बने. दूसरी ओर, अनंत सिंह ने 2005 से इस सीट पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली. 2015 में निर्दलीय और 2020 में आरजेडी के टिकट पर जीतकर उन्होंने अपनी अजेय छवि को और पुख्ता किया.

चुनावी रणनीति और चुनौतियां: इस बार मोकामा का चुनाव न केवल बाहुबल, बल्कि रणनीति और गठबंधन की ताकत पर भी निर्भर करेगा. अनंत सिंह के पक्ष में जेडीयू का मजबूत संगठन और नीतीश कुमार का चेहरा है, जबकि सूरजभान और वीणा देवी के पक्ष में आरजेडी की सियासी चाल और तेजस्वी यादव की युवा अपील है. इसके अलावा, मोकामा में विकास, बेरोजगारी और बाढ़ जैसी समस्याएं भी मतदाताओं के मन में हैं, जो वोटिंग पैटर्न को प्रभावित कर सकती हैं.

मोकामा में जबरदस्त राजनीतिक जंग

मोकामा की इस जंग में दोनों पक्ष अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं. अनंत सिंह का अजेय रिकॉर्ड और सूरजभान की रणनीतिक चाल इस चुनाव को बिहार की सबसे चर्चित सीटों में से एक बना रही है. जैसे-जैसे नामांकन और प्रचार का दौर तेज होगा, यह साफ होगा कि मोकामा का ‘सिंहासन’ किसके हिस्से जाएगा.

 

 

 

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.