दरभंगा: गुरुवार की देर रात बिहार के दरभंगा पहुंचे पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने चुनाव आयोग के कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए, जमकर हमला किया. पप्पू यादव ने चुनाव आयोग को भठियारा आयोग और चपरासी आयोग करार दिया. उन्होंने कहा कि अब कोई पूर्व चुनाव आयुक्त टीएन शेषन और केजे राव का जमाना है क्या. पप्पू यादव ने जहां एक ओर टीएन शेषन और केजे राव की प्रशंसा की तो वहीं वर्तमान चुनाव आयोग को लेकर विवादित बयान दे डाला.

चुनाव आयोग पर पप्पू यादव का हमला
पप्पू यादव ने कहा कि चुनाव आयोग BJP और RSS का चपरासी है. वहीं उन्होंने पूर्व चुनाव आयुक्त टीएन शेषन और केजे राव का नाम लेते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में स्वतंत्र रूप से कार्य होता था. वर्तमान में तो देखने से लगता है कि ये लोग घर के चपरासी हैं.

‘सिर्फ बिहार के सम्मान की बात’
बिहार बंद के दौरान पटना में अपने साथ हुई बदसलूकी के सवाल पर पप्पू यादव ने कहा कि हम बिहार के सम्मान और स्वाभिमान के लिए लड़ रहे हैं. बिहार की जिंदगी के लिए लड़ रहे हैं. पप्पू यादव के सम्मान और अपमान का क्या मतलब है. हम तो बचपन से ही अपमान और सम्मान होते रहे हैं. हम सिर्फ बिहार की सम्मान की बात करेंगे.

गिरकर चोट लगने की कही बात
वहीं उन्होंने कहा कि हमने कहीं कहा है कि हम अपमानित हुए हैं. भीड़ के कारण गिरकर हमें चोट लग गई है. हम तो गरीब और समाज के लिए एक लाख बार अपमान होंगे. हमें ऐसा अपमान मंजूर है, जिसमें बिहार और बिहारी को बचाया जा सके.

पप्पू को राहुल के पास आने से रोका गया था
असल में राहुल गांधी, तेजस्वी यादव, मुकेश सहनी, दीपांकर भट्टाचार्य और डी. राजा समेत अन्य कांग्रेस नेता बिहार बंद के दौरान 9 जुलाई को रथ की शक्ल में लोरी पर सवार हुए और मार्च में शामिल हुए थे. प्रदर्शन शुरू होने से पहले इनकम टैक्स गोलंबर पर जब राहुल गांधी के साथ नेताओं को उस लॉरी पर चढ़ाया जा रहा था, तब पप्पू यादव ने भी चढ़ने की कोशिश की थी, लेकिन उनको रोक दिया गया था.

मृतक के परिजनों से मिलने पहुंचे थे पप्पू
बता दें कि दरभंगा जिले के सिमरी गांव में बीते दिनों 19 वर्षीय युवक की चाकू मारकर निर्मम हत्या कर दी गई थी. पप्पू यादव मृतक के परिजनों के घर उनसे मुलाकात करने पहुंचे थे. उसी दौरान उन्होंने चुनाव आयोग पर बड़ा हमला किया.

क्या है भठियारा शब्द का मतलब?
बिहार में कुछ शब्द ऐसे हैं, जो लोगों की जुबान पर चढ़ा होता है. कई बार कुछ शब्दों को लेकर विवाद भी होता है. पप्पू यादव ने चुनाव आयोग को भठियारा बोला है, इसको लेकर विवाद छिड़ गया है.ऐसे में सवाल उठता है कि क्या वाकई ये आपत्तिजनक शब्द है? दरअसल बिहार के लोग अक्सर एक दूसरे को तुम भठियारा हो कहते हैं. जब सामने वाला किसी बात को लेकर निष्क्रिय की तरह व्यवहार करता है, तब इस शब्द का इस्तेमाल किया जाता है.

कौन होते हैं भठियारा?
बिहार की एक जाति को भठियारा कहते हैं, जिसका नाम ही गाली मानी जाती है. हालांकि ये ऐशी गाली है जो सार्वजनिक तौर पर कोई भी किसी तो दे देता है. भठियारा समुदाय के लोग भी इसका विरोध नहीं करते हैं.

‘भठियारा’ से जुड़े फैक्ट्स
जाति आधारित जनगणना रिपोर्ट के मुताबिक इस जाति के लोगों की मौजूदा संख्या मात्र सत्ताईस हजार से थोड़ी अधिक है यानी कि एक प्रतिशत से भी कम है. इस जाति के अधिकतर लोग भूमिहीन हैं और शहरों में अक्सर इन्हें सड़कों के किनारे गुजर-बसर करते देखा जा सकता है. भारतीय संविधान में इनका भी स्थान है. बिहार में अति पिछड़ा और यूपी में पिछड़ा वर्ग में ये शामिल हैं. ये बिहार यूपी के अलावा राजस्थान में भी रहते हैं और खुदको मुगलों द्वारा लाया गया बताते हैं.




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