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तो कट जाएंगे 2 करोड़ वोटर के नाम, बिहार वोटर लिस्ट पर इंडिया गठबंधन ने कहा- ये तो वोटबंदी है

पटना: बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य पर विपक्षी दलों ने ऐतराज जताया है. बुधवार को चुनाव आयोग के अधिकारियों से मुलाकात के बाद विपक्षी दलों के नेताओं ने आरोप लगाया कि बिहार में ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (एसआईआर) से गरीब, दलित, आदिवासी और प्रवासी मजदूरों के नाम वोटर लिस्ट से हट सकते हैं.

बिहार वोटर लिस्ट पर ‘दंगल’

बता दें कि बिहार में विधानसभा चुनाव की आहट के बीच कांग्रेस, आरजेडी, सपा , एनसीपी (शरद पवार गुट) और लेफ्ट पार्टी समेत इंडिया गठबंधन के 18 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से मुलाकात की. इस दौरान विपक्षी सदस्यों ने कहा कि इस प्रक्रिया में बिहार के वोटरों से उनके खुद और उनके माता पिता के जन्म से संबंधित प्रमाण पत्र मांगना गलत है, यह बिंहार के करीब 8 करोड़ मतदाताओं को मुश्किल में डालने वाला है.

तो 2 करोड़ वोटर हो सकते हैं बाहर

कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि हमने चुनाव आयोग से कई सवाल किए, जैसे बिहार में साल 2003 के बाद कई चुनाव हुए, क्या 22 साल में हुए वो सभी चुनाव अवैध थे?. अब अचानक एसआईआर की आवश्यकता क्यों महसूस हुई?. ऐसे में तो पूरी प्रक्रिया से दो करोड़ से अधिक मतदाता वोटर लिस्ट से बाहर हो सकते है.

विपक्षी दलों का SIR पर सवाल

कांग्रेस नेता ने कहा कि, उनसे (चुनाव आयोग) सवाल पूछा गया कि अगर वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन किया जाना था तो जून में ही उसका ऐलान क्यों किया गया, जबकि अगले कुछ महीने में चुनाव हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि इस साल चुनाव आयोग ने कई ऐलान किए, लेकिन एसआईआर का जिक्र तक नहीं किया.

चुनाव आयोग हमारी बात सुनने को तैयार नहीं था’

बिहार प्रदेश कांग्रेस राजेश राम ने आरोप लगाया कि, हमें काफी आश्चर्य हुआ कि चुनाव आयोग हमारी बात सुनने को तैयार नहीं था, चर्चा में जाने से पहले हम आधे घंटे तक जूझते रहे. चर्चा के दौरान चुनाव आयोग सिर्फ अपनी बातें कहने में व्यस्त रहा और हमें स्पेशल इंटेंशिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया समझाता रहा.

गरीबों को बेदखल करने की साजिश’

वहीं आरजेडी नेता मनोज झा ने कहा कि, यह बैठक सौहार्दपूर्ण नहीं थी. हमने गरीबों, पिछड़ों, दलितों, मुसलमानों की बात रखी, पर चुनाव आयोग की तरफ से कोई संवेदनशीलता नहीं दिखी. तेजस्वी यादव ने जो पत्र सौंपा, जिसमें बताया गया कैसे यह बेदखली की सुनियोजित साजिश है. 20% प्रवासी बिहारी भी इस नए नियम के निशाने पर हैं.

क्या बोले दीपांकर भट्टाचार्य?

माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि, चुनाव आयोग का कहना है कि 2003 की वोटर लिस्ट में अगर आपका नाम दर्ज है तो उसे बिहार का वोटर माना जाएगा, अगर आपका नाम उस लिस्ट में नहीं है तो आपको दोबारा दस्तावेज देने होंगे और नागरिकता साबित करनी होगी, यह गलत है. ऐसे में यह तो सीधी वोटबंदी है.

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