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अब रोजगार से जुड़ेंगे संस्कृत विद्यालयों के छात्र, संस्कृत शिक्षा में नयी क्रांति, बिहार बोर्ड का ऐतिहासिक निर्णय

बिहार में संस्कृत शिक्षा को आधुनिक स्वरूप देने और उसे व्यावसायिक अवसरों से जोड़ने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल की गई है। बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड, पटना की आज सम्पन्न हुई महत्वपूर्ण बैठक में कई क्रांतिकारी फैसले लिए गए, जो राज्य में संस्कृत शिक्षा के भविष्य को नया आयाम देंगे।

बैठक में शिक्षकों की गुणवत्ता सुधारने, पाठ्यक्रम को आधुनिक बनाने और छात्रों की संख्या बढ़ाने के लिए ठोस रणनीतियाँ तय की गईं। सबसे महत्वपूर्ण निर्णय यह लिया गया कि संस्कृत विद्यालयों के शिक्षकों को प्रशिक्षण देने हेतु diet, BIET और SCERT जैसी संस्थाओं के साथ MOU साइन किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य शिक्षकों को नई शैक्षिक विधियों और तकनीकों से प्रशिक्षित करना है, ताकि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हो सके।

छात्रों की संख्या में गिरावट को ध्यान में रखते हुए संस्कृत विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। साथ ही छात्रों को राज्य सरकार की प्रमुख योजनाओं—मध्यान्ह भोजन, छात्रवृत्ति, पोशाक, पुस्तक व साइकिल योजना—का लाभ दिलाने के लिए शिक्षा विभाग को पत्र भेजा जाएगा।

एक ऐतिहासिक फैसले के तहत संस्कृत पाठ्यक्रम में अब कंप्यूटर और व्यावसायिक शिक्षा को भी शामिल किया जाएगा। यह कदम संस्कृत छात्रों को आधुनिक तकनीकी कौशल और रोजगार के अवसरों से जोड़ेगा, जिससे यह शिक्षा प्रणाली प्रासंगिक और उपयोगी बन सकेगी।

बैठक में यह भी निर्णय हुआ कि बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट शीघ्र लॉन्च की जाएगी, जिससे सूचना पारदर्शिता और त्वरित संप्रेषण को बढ़ावा मिलेगा।

इस ऐतिहासिक बैठक में विधायक विनय कुमार चौधरी, विधान पार्षद निवेदिता सिंह सहित शिक्षा विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी एवं गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे।

यह पहल न केवल संस्कृत शिक्षा को पुनर्जीवित करने का प्रयास है, बल्कि इसे 21वीं सदी के अनुरूप ढालने की दिशा में एक मजबूत और निर्णायक कदम भी है।

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