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बिहार में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा करोड़ों का पुल, झारखंड के कई गांव से टूटा संपर्क

गया: बिहार में बारिश के साथ ही बाढ़ जैसे हालात बनने लगते हैं और इस दौरान पुल-पुलिया के ध्वस्त होने के मामले भी सामने आते हैं. 2023 में तो पुल के ध्वस्त होने का मानों ट्रेंड ही चल पड़ा था. वहीं 2025 में भी मानसून की पहली बारिश के साथ ही पुल-पुलियों की गुणवत्ता की हकीकत सामने आने लगी है. इसी कड़ी में गया जी में गुरुवार को बिहार- झारखंड को जोड़ने वाले निलांजना नदी पर बने कोठवारा- बरिया पुल के क्षतिग्रस्त होने का मामला सामने आया था.

बिहार में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा एक और पुल

मूसलाधार बारिश और नदी में आई तेज धार के साथ पुल के तकरीबन सभी पाये दरक गए थे. कुछ पायों में कई इंच का डिफरेंस आ गया था. अब पुल निर्माण को लेकर कई तरह की बातें सामने आई है. ग्रामीणों की मानें, तो तकरीबन 15 करोड़ की लागत से बने इस पुल में भ्रष्टाचार काफी बरती गई थी. यही वजह रही, कि यह आज दरक गया है और कभी भी ध्वस्त हो सकता है.

पुल पर आवाजाही बंद

फिलहाल शेरघाटी एसडीएम मनीष कुमार ने खतरे की स्थिति को देखते हुए किसी भी तरह के आवाजाही पर रोक लगा दी है. ईटीवी भारत ने गया जी के डोभी प्रखंड अंतर्गत कोठवारा-बरिया पुल के क्षतिग्रस्त होने की खबर प्रमुखता से चलाई थी. खबर प्रकाशित होने के बाद जिला प्रशासन के अधिकारियों की नींद खुली और वे मौके पर पहुंचकर आवश्यक कार्रवाई करने लगे में जुट गए हैं.

लगाया जा रहा बैरियर

गया जी जिले के अंतर्गत शेरघाटी अनुमंडल के एसडीएम मनीष कुमार मौके पर पहुंचे और उन्होंने इस पुल पर आवाजही को पूरी तरह से रोकने के निर्देश दिया है. फिलहाल ढाई फीट के लोहे का बैरियर यहां लगाने का काम शुरू कर दिया गया है, ताकि कोई आवागमन नहीं हो सके.

झारखंड के लिए अहम है पुल

डोभी प्रखंड के कोठवारा में निलांजना नदी पर बने कोठवारा- बरिया पुल को काफी महत्वाकांक्षी माना जाता है. क्योंकि यह न सिर्फ दर्जनों गांवों को जोड़ता है, बल्कि झारखंड की सीमा से भी सटा है. झारखंड से भी प्रतिदिन सैकड़ों लोगों का आवागमन इस मार्ग से होता है.

ग्रामीणों ने खोली भ्रष्टाचार की पोल

ऐसे में इस पुल के क्षतिग्रस्त होने से न सिर्फ बिहार के डोभी प्रखंड के दर्जनों गांव बल्कि पड़ोसी राज्य झारखंड के कई गांव के लोगों के प्रभावित होने की बात सामने आई है. इस पुल का निर्माण 2015 से शुरू हुआ था. पुल निर्माण को लेकर ग्रामीणों ने जो कहानी सुनाई, वह भ्रष्टाचार की पोल खोलता है.

पुल की गुणवत्ता पर सवाल

ग्रामीणों के अनुसार 2015 में जो कंस्ट्रक्शन कंपनी ने इस पुल का निर्माण किया था, उसने भ्रष्टाचार की हदें पार कर दी. उसके कार्यशैली को लेकर शुरू से ही ग्रामीणों ने विरोध शुरू किया था. पुल में जो मटेरियल लगने चाहिए थे, जो गुणवत्ता होनी चाहिए थी, उसमें काफी लापरवाही बरती जा रही थी.

कंपनी ने कई ग्रामीणों पर केस किया था दर्ज

भ्रष्टाचार देखकर ग्रामीणों ने विरोध किया, तो ग्रामीणों को धमकी दी जाने लगी. झूठे केस में फंसाने की बात कही जाने लगी. इस क्रम में कई लोगों पर झूूठी प्राथमिकी भी दर्ज कर दी गई. कंस्ट्रक्शन कंपनी से जुड़े लोगों ने यह प्राथमिकी दर्ज की थी, जिसके बाद डर से ग्रामीणों ने विरोध करना बंद कर दिया.

केस के बाद ग्रामीणों ने साधी चुप्पी

ग्रामीण उपेंद्र यादव के मुताबिक वे उस समय सरपंच थे. जब विरोध शुरू किया, तो हम ग्रामीणों को ही प्रताड़ित किया जाने लगा. उन्होंने बताया कि हम पर केस दर्ज कर दिया गया, जिस कारण हम लोगों ने विरोध करना बंद कर दिया.

बिना उद्घाटन पुल चालू

ग्रामीण यह भी बताते हैं, कि बिना उद्घाटन के ही यह पुल चालू कर दिया गया था. 2022 में इस पर आवागमन चालू हुआ और आज 2025 में देखें तो यह पुल क्षतिग्रस्त हो गया है.

जांच की उठी मांग

पुल के तकरीबन सभी पायों में दरार आ गई है. कई इंच तक आई डिफरेंस को देखा जा सकता है. ग्रामीण बताते हैं, कि इस मामले को लेकर वे मांग करते हैं, कि इसमें हुए भ्रष्टाचार की पूरी जांच हो. कंस्ट्रक्शन कंपनी समेत जिन अधिकारियों ने लापरवाही बरती, उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाए.

पहले भी ध्वस्त हुए कई पुल

पुल-पुलिया में भ्रष्टाचार की ये कोई नई कहानी नहीं है. इससे पहले 2024 में भी भागलपुर के पीरपैंती में पुल चौखंडी पुल ध्वस्त हो गया था. वहीं बख्तियारपुर से समस्तीपुर के बीच बन रहे फोरलेन पुल का स्पैन गिर गया. वहीं 2023 में तो काफी पुल गिरे थे. छपरा में कई पुल-पुलिया गिरे तो भागलपुर से भी खबर आई थी. इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष ने एक दूसरे पर जमकर हमला भी किया.

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