चुनाव लड़ने के दौरान हलफनामे में दो बच्चों के बीज जन्म का अंतर सिर्फ चार महीने बताने की गलती एक पार्षद को अपनी सदस्यता गंवाकर चुकानी पड़ी।

राज्य निर्वाचन आयोग ने जिलाधिकारी को पार्षद के विरुद्ध गलत हलफनामा व तथ्य छुपाने के लिए नियमानुसार कार्रवाई करने का आदेश दिया है।

पूरा मामला भागलपुर जिले से जुड़ा है। जहां बदरूद्दीन को वार्ड 40 के पार्षद पद से हटा दिया गया है। नजमा खतून ने चार अप्रैल 2008 के पूर्व दो से अधिक संतान होने का आरोप लगाते हुए मो. बदरूद्दीन को पदमुक्त करने का आग्रह किया था।सुनवाई के दौरान नजमा के अधिवक्ता ने बताया कि प्रतिवादी को चार संतान हैं।

उन्होंने बताया कि प्रथम संतान मो. बहाउद्दीन की जन्म तिथि 27 नवंबर 2000, दूसरे हसनुद्दीन की 25 दिसंबर 2002, तृतीय मो. सहवाजुद्दीन की एक जनवरी 2008 व चतुर्थ संतान मो. अजीजुद्दीन की जन्म तिथि एक जनवरी 2010 है।

सुनवाई के दौरान मो. अजीजुद्दीन का जन्म प्रमाणपत्र, मो. बहाउद्दीन, हसनुद्दीन व मो. सहवाजुद्दीन के आधारकार्ड के माध्यम से जन्मतिथि को दिखाया गया। साथ ही राशन कार्ड का भी अवलोकन कराया। जिसमें मो. बदरूद्दीन के परिवार के सदस्यों का विवरण व आयु दर्ज हैं।

बदरूद्दीन ने नामांकन पत्र में जो कागजात समर्पित किए उनमें दो संतान मो. सहवाजुद्दीन व मो. अजीजुद्दीन के जन्म प्रमाणपत्र में जन्मतिथि 27 अगस्त 2007 व एक जनवरी 2008 दर्शाया गया है। दो संतान के बीच चार माह का अंतर दिखाया गया है। जो जैविक रूप से संभव नहीं है।

वहीं, प्रतिवादी के अधिवक्ता ने कहा कि अंतिम संतान की जन्मतिथि के साथ छेड़छाड़ की गई है। रेडियोलॉजी व डेंटल विभाग ने बाद के बच्चों की उम्र 13 व 14 वर्ष आंकी।

आयोग ने पाया कि मो. बदरूद्दीन को चार अप्रैल 2008 के उपरांत दो से अधिक जीवित संतान रहने के कारण वे तथ्यों को छुपाकर गलत शपथ पत्र के आधार पर वार्ड पार्षद का चुनाव जीतने में कामयाब रहे।





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