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174 घड़ियाल के बच्चों को गंडक नदी में छोड़ा गया, मां की आवाज सुनते ही दौड़ पड़े सभी

बगहा: इंडो नेपाल सीमा से निकलने वाली गंडक नारायणी नदी चंबल नदी के बाद दूसरी ऐसी नदी है, जहां साल दर साल घड़ियालों और मगरमच्छों की संख्या में इजाफा हो रहा है. वर्ल्ड क्रोकोडाइल डे पर बिहार के लिए यह किसी सौगात से कम नहीं है. ऐसे में विश्व मगरमच्छ दिवस (World Crocodile Day) के मौके पर गंडक में 174 घड़ियाल के बच्चों को छोड़ा गया.

गंडक में छोड़े गए 174 घड़ियाल के बच्चे

दरअसल वर्ष 2013 में गंडक घड़ियाल रिकवरी प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई थी. तब से अब तक तकरीबन 775 से ज्यादा घड़ियाल के बच्चों की चहचहाहट से गंडक नदी गुलजार हुआ है. विश्व मगरमच्छ दिवस के ठीक पहले गंडक नदी में 174 घड़ियाल के बच्चों को छोड़ा गया.

हैचरी के बाद मां के पास लौटे नन्हे घड़ियाल

बता दें कि वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया व वन विभाग द्वारा संयुक्त रूप से स्थानीय प्रशिक्षित ग्रामीणों के सहयोग से विगत तीन माह से गंडक नदी किनारे घड़ियाल के अंडों का संरक्षण किया जा रहा था. जिसके बाद उनका हैचरी कराया गया और फिर गंडक नदी में 174 घड़ियाल के बच्चों को छोड़ दिया गया.

घड़ियालों का संरक्षण और संवर्धन

घड़ियाल के इन अंडों के संरक्षण और प्रजनन में लॉस एंजिल्स जू कैलिफोर्निया का भी सहयोग मिलता है. इसकी देखरेख में WTI और वन एवं पर्यावरण विभाग घड़ियालों के संरक्षण और संवर्धन में जुटा है.

वन संरक्षक सह निदेशक डॉ नेशामणि के ने बताया कि वर्ष 2013 से गंडक घड़ियाल रिकवरी प्रोजेक्ट के तहत घड़ियालों संरक्षण और संवर्धन किया जा रहा है. प्रतिवर्ष नदी किनारे बालू में सैकड़ों अंडों का संरक्षण कर उनका प्रजनन कराया जाता है.

2024 में छोड़े गए थे 160 बच्चे

पिछले साल 160 बच्चों को नदी में छोड़ा गया था, जबकि इस वर्ष 174 बच्चों की किलकारी गूंजी है. वन्य जीव जंतुओं के जानकार वी डी संजू बताते हैं कि मगरमच्छों और उनके जैसे अन्य सरीसृपों जैसे घड़ियाल और एलिगेटर की संरक्षा, संरक्षण और जागरूकता के लिए प्रत्येक वर्ष 17 जून को वर्ल्ड क्रोकोडाइल डे मनाया जाता है.

घड़ियालों का संरक्षण बड़ी चुनौती

वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के प्रोजेक्ट हेड सुब्रत के बहेरा ने बताया कि पूरे विश्व में मगरमच्छ की 23 प्रजातियां पाई जाती हैं. जिसमें भारत में तीन प्रजाति के मगरमच्छ मिलते हैं, जो क्रमशः दलदली मगरमच्छ, खारे पानी का मगरमच्छ और घड़ियाल के नाम से जाने जाते हैं.

इनके आवास को नष्ट करना, इनका शिकार करना समेत कई चुनौतियां हैं. नतीजतन भारत सरकार द्वारा वर्ष 1975 में इनके संरक्षण के लिए मगरमच्छ संरक्षण परियोजना का शुभारंभ किया गया था.

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