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अब बिहार में अपराधियों की खैर नहीं, बिहार पुलिस का बदला अंदाज

बिहार पुलिस ने न्यायिक प्रक्रिया को तेज करने और अदालती आदेशों के पालन में होने वाली देरी को खत्म करने के लिए एक नई प्रशासनिक व्यवस्था शुरू की है।

इस पहल के तहत, अब बिहार के सभी 1870 न्यायालयों और उनसे जुड़े थानों में कोर्ट प्रभारी और कोर्ट नायब नियुक्त किए जाएंगे।

नई व्यवस्था का उद्देश्य और कार्यान्वयन

इस नई प्रणाली का मुख्य लक्ष्य न्यायालयों द्वारा जारी किए गए समन, वारंट और कुर्की जैसे महत्वपूर्ण आदेशों का समय पर और प्रभावी ढंग से पालन सुनिश्चित करना है। यह कदम पुलिस मामलों के त्वरित निपटारे में मदद करेगा।

अपर पुलिस महानिदेशक (सीआईडी) पारसनाथ ने बताया कि इस व्यवस्था को पहले चरण में पटना जिले में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया गया था, जिसके नतीजे बेहद सकारात्मक रहे। पटना में इस प्रणाली से गवाहों की उपस्थिति में तीन गुना बढ़ोतरी देखी गई।

भूमिकाएँ और जिम्मेदारियाँ

कोर्ट प्रभारी: प्रत्येक थाने में इंस्पेक्टर या सब-इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी को कोर्ट प्रभारी बनाया जाएगा। इनका मुख्य कार्य विभिन्न न्यायालयों के साथ समन्वय स्थापित करना होगा।

कोर्ट नायब: सिपाही स्तर के पुलिसकर्मी को कोर्ट नायब नियुक्त किया जाएगा। इनकी जिम्मेदारी न्यायालय के आदेशों को समय पर थानों तक पहुंचाना होगा।

पारदर्शिता और जवाबदेही

सीआईडी के आईजी दलजीत सिंह ने बताया कि न्यायालय और थाना दोनों स्तरों पर आदेशों का रिकॉर्ड रखा जाएगा। इससे न केवल मॉनिटरिंग की प्रक्रिया आसान होगी, बल्कि मामलों के निपटारे में भी तेजी आएगी।

आंकड़ों के अनुसार, 2025 की शुरुआत से अब तक 17,207 पुलिसकर्मियों, 3,318 डॉक्टरों और 49,515 अन्य गवाहों की गवाही कराई जा चुकी है, जो इस नई व्यवस्था की प्रभावशीलता को दर्शाता है।

यह महत्वपूर्ण बदलाव बिहार में न्याय प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाने की दिशा में एक अहम कदम है।

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