पटना: बिहार अक्टूबर-नवंबर में चुनाव होना है और इसको लेकर एनडीए में अभी तक पूरी तरह से चुनावी हलचल नहीं दिख रही है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कुछ महीने पहले एक बड़ा राजनीतिक ऐलान करते हुए एनडीए को राज्य की सभी 243 विधानसभा सीटें जीतने का मंत्र दिया था. हैरानी की बात यह है कि इस घोषणा के दो महीने बाद भी एनडीए का चुनावी अभियान जमीनी स्तर पर शुरू नहीं हो पाया है.

सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय नहीं
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि एनडीए के भीतर सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय न हो पाना ही इस देरी का सबसे बड़ा कारण है. जब तक यह फार्मूला साफ नहीं होता तब तक कोई भी दल खुलकर जमीनी स्तर पर अपना प्रचार अभियान शुरू करने की स्थिति में नहीं है. हालांकि जदयू के प्रदेश अध्यक्ष इस मामले में कुछ भी बोलने से बच रहे हैं.

सीट शेयरिंग भरोसे का इम्तिहान
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि जैसे ही सीटों के बंटवारे पर सहमति बन जाएगी तो एनडीए की ओर से चुनावी गतिविधियां तेजी से शुरू हो जाएंगी. यह राजनीतिक गठबंधन में आपसी समझ और भरोसे का भी इम्तिहान है, क्योंकि सीट शेयरिंग का मामला अक्सर दलों की ताकत पुराने प्रदर्शन और सामाजिक समीकरणों के आधार पर जटिल हो जाता है.

अमित शाह के निर्देश के बाद भी कार्यक्रम पर ग्रहण
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 243 विधानसभा सीटों को जीतने के लिए बिहार में एनडीए के पांचों घटक दल भाजपा, जदयू, लोजपा रामविलास, हम और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के नेताओं को टिप्स दिये थे. बैठक 30 मार्च को मुख्यमंत्री आवास में हुई थी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी उस बैठक में शामिल हुए थे और पांचों घटक दल के शीर्ष नेता भी मौजूद थे.

चुनावी रणनीति में जुटे घटक दल
लोजपा आर के प्रवक्ता प्रोफेसर विनीत सिंह का कहना है कि हम लोगों का अपना कार्यक्रम चल रहा है. अभी आरा में सम्मेलन हुआ था और 29 जून को राजगीर में सम्मेलन करने जा रहे है और जुलाई में भी कार्यक्रम होगा.

वहीं उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी के तरफ से भी कार्यक्रम चल रहा है. जिस दिन चिराग पासवान का आरा में कार्यक्रम था उसी दिन मुजफ्फरपुर में उपेंद्र कुशवाहा ने रैली थी. एनडीए के घटक दल अलग-अलग कार्यक्रम करने लगे हैं.

एनडीए के लिए चुनौती
राजनीतिक विशेषज्ञ प्रिय रंजन भारती ने कहा कि अच्छी बात है कि प्रधानमंत्री मधुबनी और बिक्रमगंज में बड़ी रैली की है जिसमें एनडीए के घटक दल ने भी ताकत लगाई थी. ऐसे चुनाव में तीन-चार महीना ही बचा है. ऐसे में सभी 243 विधानसभा में कार्यक्रम करना एक चुनौती होगा.

20 जून को पीएम मोदी का बिहार दौरा
बीजेपी और जदयू के नेता जरूर कह रहे हैं कि विधानसभा स्तर पर भी एनडीए का कार्यक्रम चलेगा हम लोग एकजुट हैं. जिला सम्मेलन में यह दिखा चुका है और जो लक्ष्य एनडीए ने रखा है. 225 सीटों का उसे हम लोग प्राप्त करेंगे, लेकिन एनडीए के अन्य घटक दलों को संयुक्त अभियान के बारे में अभी किसी तरह की कोई जानकारी नहीं है. दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 20 जून को कार्यक्रम है उसके बाद इस पर चर्चा होगी और तब तक सीट शेयरिंग का फार्मूला भी बहुत हद तक तय हो जाएगा.

बिहार में चुनाव कब होंगे?
बिहार की वर्तमान यानी नीतीश सरकार का कार्यकाल 23 नवंबर 2020 से शुरू हुआ था. नीतीश सरकार का कार्यकाल इस साल यानी 2025 में 22 नवंबर तक है. जाहिर है कि इससे पहले चुनाव होंगे.

माना जा रहा है कि सितंबर से अक्टूबर के बीच आचार संहित लग जाएगी. माना ये भी जा रहा है कि अक्टूबर से नवंबर के शुरुआती हफ्ते के बीच वोटिंग और मतों की गिनती संपन्न कराई जा सकती है.



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