मसौढ़ी: बिहार में आज लोक आस्था का महापर्व छठ का तीसरा दिन है. आज तीसरे दिन संध्या अर्घ्य दिया जाता है. यह मुख्य दिन होता है. श्रद्धालु नदी या तालाब के किनारे जाकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं. कार्तिक महीने और चैत महीने में चार दिवसीय अनुष्ठान छठ महापर्व पर वैसे तो प्रसाद के रूप में बहुत कुछ चढ़ाया जाता है लेकिन हम बात कर रहे हैं गन्ना और ठेकुआ की. छठ पर्व के इस महाप्रसाद की बहुत मान्यता है.

छठ पूजा में जरूर चढ़ाएं ये प्रसाद: गन्ना छठी मैया को अर्पित किया जाता है, उसी गन्ने को प्रसाद के रूप में वितरित भी किया जाता है. छठ पूजा को बिना गन्ना और ठेकुआ के अधूरा माना जाता है. छठी मैया की उपासना करने वाली महिलाएं गन्ना को बांधकर घाट या नदी में सूर्य की उपासना करती हैं.

वहीं पूजा के डाला और सूप में भी गन्ने के टुकड़े और ठेकुआ को रखा जाता है. ऐसी मान्यता है कि इससे परिवार और रिश्तों में मिठास बनी रहती है. मान्यता यह भी है कि छठी मैया का प्रिय फल गन्ना है. उन्हें गन्ना चढ़ाने से समृद्धि प्राप्त होती है.

ये खास प्रसाद चढ़ाने से मिलेगा लाभ: श्री राम जानकी ठाकुरवाड़ी मंदिर के मुख्य पुजारी गोपाल पांडे ने कहा कि छठ पूजा को बिना गन्ना के अधूरा माना जाता है. छठी मैया की उपासना करने वाली महिलाएं गन्ना को बांधकर घाट या नदी में सूर्य की उपासना करती हैं. मान्यता यह भी है कि छठी मैया का प्रिय फल गन्ना है. उन्हें गन्ना चढ़ाने से समृद्धि प्राप्त होती है. इसके अलावा उन्होंने बताया की छठ पूजा के दौरान सूर्य को जीवन के स्रोत के रूप में पूजा जाता है. ऐसी मान्यता है कि सूर्य की ऊर्जा बीमारियों को ठीक करने, समृद्धि सुनिश्चित करने और कल्याण प्रदान करने में मदद करती है.

भक्त स्वास्थ्य, समृद्धि और खुशी के लिए आशीर्वाद मांगने के लिए सूर्य और छठी मैया की पूजा करते है. वहीं छठ घाट पर सूर्य उपासना के दौरान छठ व्रती पांच गन्ना के टुकड़े को एक साथ बांधकर पूजा करती है. इसका मतलब है कि पांच गन्ना के टुकड़े पांच तत्वों का प्रतीक माना जाता है. जिससे मानव शरीर बना है और पांचो प्रकृति की पूजा होती है.

महाप्रसाद ठेकुआ है खास: छठ पूजा में छठी मैया को विशेष प्रसाद ठेकुआ चढ़ाया जाता है. साथ ही ठेकुआ के बिना छठ का यह महापर्व अधूरा माना जाता है. छठ में इसे बनाने के लिए मिट्टी के चूल्हे और आम की लकड़ी का इस्तेमाल किया जाता है.

जिसमें गेहूं के आटे, गुड़ और घी का प्रयोग होता है. ठेकुआ तैयार कर रही छठव्रती चांदना कुमारी ने बताया कि ठेकुआ लकड़ी के गोल सांचे में ही तैयार किया जाता है. हालांकि गोल के अलावा ठेकुआ कई आकर में भी बनाया जाता है.



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