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राहत भरी खबर : राजधानी पटना में 9 दिनों से नहीं मिला एक भी कोरोना पॉजिटिव मरीज, अस्पतालों में भी घटी संदिग्धों की संख्या…

कोरोना संक्रमण और पी’ड़ितों की संख्या को लेकर पटना के लिए राह’त की बात है। पिछले नौ दिनों से शहर के किसी भी हिस्से से कोरोना के नए पॉजिटिव नहीं मिले हैं। शुरुआत के छह पी’ड़ितों में से पांच स्वस्थ होकर अपने घर चले गए हैं। छठा मरीज गौतम भी अब पूरी तरह से स्वस्थ है। एक-दो दिन में उसे भी एनएमसीएच से छ्ट्टी मिल जाएगी। 

राहत की बात यह भी है कि पटना से जो पी’ड़ित पाए गए हैं, उनके सभी रिश्तेदार अथवा अन्य करीबी कोरोना निगेटिव पाए गए हैं। यहां के छह पॉजिटिव में से एक स्कॉटलैंड, एक नेपाल और एक गुजरात से आए थे। बाकी तीन लोग शरणम अस्पताल के कर्मी हैं। ये लोग मुंगेर के कोरोना पी’ड़ित युवक सैफ अली के संपर्क में आए थे। इस अस्पताल के सभी कर्मियों, वहां भर्ती मरीजों और उनके परिवार तक को चिह्नित कर उनकी कोरोना जांच सिविल सर्जन की टीम द्वारा कराई गई, लेकिन इसमें दो वार्ड बॉय और एक नर्स को छोड़कर कोई पॉजिटिव नहीं पाया गया। 

समय पर पहचान होने से टू’टी चेन 
सिविल सर्जन डॉ. आरके चौधरी ने बताया कि समय पर कोरोना पीड़ितिों की पहचान होने से उनकी संक्रमण चेन नहीं बन पायी। डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की तत्परता से पटना में इस चेन को तोड़ने में सफलता मिली। यही कारण है कि पटना में  मरीजों की संख्या पर नियंत्रण दिख रहा है। शहरवासी भी अब लॉकडाउन से छूट की उम्मीद कर रहे हैं। दुकानदार हों या आम नागरिक सबका मानना है कि अगर कुछ दिन और कोरोना पॉजिटिव नहीं आते हैं तो  लॉकडाउन में छूट मिलनी चाहिए। 

शहर के तीन अस्पतालों में कोरोना की जांच अभी की जा रही है। सैंपल लेने के लिए पीएमसीएच, एनएमसीएच और एम्स को सेंटर बनाया गया। इसके अलावा फुलवारी और न्यू गार्डिनर में भी सं’दिग्धों का सैंपल लिया जा रहा है, लेकिन संदिग्धों में पटनावासियों कीसंख्या काफी कम है। आईजीआईएमएएस में कोरोना के नोडल पदाधिकारी डॉ. कृष्ण गोपाल ने बताया कि यहां प्रतिदिन 62 से 95 सैंपलों की जांच की जा रही है। उनमें से ज्यादातर दूसरे जिले का ही सैंपल होते हंै। 

संक्रमण रोकने में प्रशासनिक तत्परता की अहम भूमिका रही
जिला प्रशासन और सिविल सर्जन द्वारा दिखाई गई तत्परता भी पटना में अबतक कोरोना पीड़ितों की संख्या सीमित करने में कारगर रही है। सैफ अली से संक्रमित हो या बाहर से आए लोग, प्रशासन की टीम ने उनको आइसोलेट करने में तत्परता दिखाई। किसी की भी जांच में कोई कोताही नहीं बरती गई। यहां तक की मरकज में शामिल होकर आए लोगों की भी पहचान कर उनकी जांच में तत्परता दिखाई जा रही है। पटना में विदेशों से आने वाले 300 से अधिक लोगों की जांच की गई है। सिविल सर्जन की टीम अब गांवों में भी लोगों की जांच में तत्परता दिखा रही है। दूसरे राज्यों से बिहार आने वाले लोगों की सूची बनाकर उनके स्वास्थ्य पर निगरानी भी रखी जा रही है। 

सावधानी बरतने का हुआ है असर   
एम्स पटना के कोरोना के नोडल पदाधिकारी डॉ. नीरज अग्रवाल ने कहा कि संक्रमित मरीजों और उनके परिजनों व संपर्क में आनेवाले लोगों को लेकर राज्य में पर्याप्त सावधानी बरती गई। नए मरीजों का नहीं मिलना शहरवासियों के लिए राहत की बात है। लेकन अभी शहरवासियों को और संयम बरतने की जरूरत है। लॉक डाउन का पूरी तरह से पालन करते हुए घरों से नहीं निकलना चाहिए। एक संक्रमित व्यक्ति कई लोगों को संक्रमित कर सकता है।

कोरोना के नए मरीजों का नहीं मिलना और संदिग्धों की संख्या में कमी राज्य और पटना के लिए अच्छी खबर है। लेकिन अभी बहुत ज्यादा उत्साहित होने की जरूरत नहीं है। देश के दूसरे हिस्से में मरीज मिल रहे हैं। इसलिए अभी कोरोना को लेकर कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। लोगों को लॉक डाउन का पूरी तरह से पालन करना चाहिए। सोशल डिस्र्टेंंसग के नियम को कड़ाई से अपनाना चाहिए। मरीज कम आ रहे हैं, इसका मतलब यह नहीं होना चाहिए कि लॉक    डाउन को तुरंत समाप्त कर देना चाहिए। इस पर निर्णय तो भारत सरकार और राज्य सरकार को करना है। लोगों को अभी पर्याप्त सावधानी बरतनी होगी। 
-डॉ. मदनपाल सिंह, कोरोना के राज्य नोडल पदाधिकारी, बिहार सरकार।

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