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मुजफ्फरपुर में मना बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस दिवस:बीएसएपी को दंगा निरोधी वाहिनी के रूप में किया जाएगा विकसित

मुजफ्फरपुर में शुक्रवार को बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस दिवस बनाया गया। इस अवसर पर रैपिड एक्सन फोर्स की तर्ज पर बीएसएपी को दंगा निरोधी वाहिनी के रूप में विकसित किया जाएगा। इसमें बीएसएपी छह मुजफ्फरपुर, बीएसएपी सात कटिहार और बीएसएपी महिला वाहिनी सासाराम को विशेषकृत दंगा निरोधी बटालियन बनाया गया। इसे लेकर बीएसएपी छह के कमांडेंट विशाल शर्मा ने वीडियो के माध्यम से जानकारी दी है।

वर्ष 2021 में बीएमपी को बीएसएपी एक्ट लागू किया गया था। बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस की 03 वाहिनियों (बीएसएपी- 6 मुजफ्फरपुर, बीएसएपी-7 कटिहार एवं बीएसएपी महिला वाहिनी, सासाराम) को विशेषिकृत दंगा निरोधी वाहिनी के रूप में विकसित करते हुए बिहार दंगा निरोधी वाहिनी का गठन किया गया है। बीएसएपी- 6 दंगा अथवा दंगा नियंत्रण के लिए इन वाहिनियों को विशेष प्रशिक्षण एवं विशेष साधन उपलब्ध कराये गये हैं।

इसके अलावा बीएसएपी कैसे काम करती है, उससे संबंधित वीडियो भी कमांडेट ने शेयर किया है। भीड़ या उपद्रवियों को नियंत्रित करने को लेकर कैसे काम करती है, यह भी बताया है। बीएसएपी कितने प्रकार से दंगा व भीड़ को नियंत्रित करती है, उसके भी उपाये बताये हैं।

बताया जा रहा कि बीएसएपी की दंगा निरोधी बटालियन राज्य की आंतरिक सुरक्षा में सेंध लगाने वालों से निबटने में अपने-आप में सक्षम है। यह पहले बातचीत कर निदान खोजती है। फिर बात नहीं बनने पर पानी, आंशु गैस क गोला दागती है, फिर लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर करती है। इससे बात नहीं बनने पर ही फायरिंग का सहारा लेती है।

साथ ही घायलों को इलाज भी कराती है। इसका मुख्य उद्देश्य दंगा अथवा दंगा जैसी स्थितियों को नियंत्रित करना है। जो किसी धार्मिक एवं सांप्रदायिक तनाव, जातीय तनाव, आंदोलन, बंद, हड़ताल आदि से उत्पन्न हुई हो, अथवा आकस्मिक स्थिति में किसी भी प्रकार की विधि-व्यवस्था की स्थिति को नियंत्रित करने के साथ-साथ प्रतिनियुक्त स्थल पर बलों द्वारा सामाजिक रूप से सामान्य नागरिकों के साथ समन्वय स्थापित कर सकारात्मक छवि को बनाये रखने के लिए किया गया है।

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