किशनगंज में 7 महीने बाद शकील हत्याकांड ने दोबारा तूल पकड़ा है। परिजनों के कड़ी मशक्कत के बाद गुरुवार को शकील आलम के शव को कब्र से निकालकर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
मुख्य गवाह की भी हुई थी संदिग्ध हालत में मौत
बहादुरगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत अलताबारी गांव निवासी शकील आलम का शव 09 अगस्त 2022 को संदिग्ध हालत में फांसी के फंदे से लटका मिला था। घटना के बाद सामाजिक स्तर से पंचायती कर मृतक के शव को कब्र में परिजनों के द्वारा दफन कर दिया गया था। वहीं पंचायती के बाद न्याय न मिल पाने के कारण शकील के परिजनों के द्वारा किशनगंज न्यायालय में न्याय की फरियाद लगाई गई थी, जिसके बाद शकील हत्याकांड के मुख्य गवाह उसके साले मिन्हाज की भी 28 सितंबर 2022 को संदिग्ध हालत में मौत हो गई थी।

मजिस्ट्रेट, पुलिस बल और चिकित्सीय दल की मौजूदगी में निकाला गया शव
आमरण अनशन पर बैठे थे परिजन
हत्याकांड के मुख्य गवाह मामले की हत्या के बाद मामले ने तुल पकड़ लिया था, जिसके बाद पुलिस ने शकील की हत्या के मुख्य आरोपी मास्टर मकसूद आलम के साथ अन्य पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। वहीं बगैर पोस्टमार्टम के शकील के शव को दफनाने के कारण परिजनो में नाराजगी थी, जिसको लेकर परिजन बीते मंगलवार को आमरण अनशन पर बैठ गए थे। बुधवार को एसपी के आश्वासन पर परिजनों ने आमरण अनशन को तोड़ दिया। इसी क्रम में जिला पदाधिकारी के द्वारा जारी पत्र के आलोक में आज मजिस्ट्रेट, पुलिस बल और चिकित्सीय दल की मौजूदगी में अलताबाड़ी गावं स्थित कब्रिस्तान से मृतक शकील के शव के अवशेष को कब्र से बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल किशनगंज भेज दिया गया है।
क्या कहती हैं मृतक की पत्नी
घटना पर जानकारी देते हुए मृतक शकील आलम की पत्नी नूरजहां खातून के परिजनों ने बताया कि शकील की फांसी के फंदे में टांगकर हत्या की गई थी। वहीं मृतक के परिजनों ने किशनगंज न्यायालय में आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई थी, जिसके बाद आज मृतक शकील के शव के अवशेष को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।



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