गया के अति नक्सल प्रभावित इलाके के रहने वाले और ठेले पर चना बेचकर जीवन यापन करने वाले के बेटे ने खुद का और अपने मां-बाप का नाम रोशन किया। चंदन ने बिहार इंटरमीडिएट की परीक्षा में आर्ट्स पेपर में 465 अंक लाकर पूरे बिहार में पांचवां स्थान प्राप्त किया। रिजल्ट के आते ही उसके घर में खुशी का माहौल बना हुआ है। खास बात यह है कि जिस समय रिजल्ट आया उस समय चंदन कुमार के पिता ठेली पर चना बेच रहे थे।
सुनील चौधरी ठेली पर भिगोया हुआ चना बेचते हैं। चने बेचकर ही अपने घर परिवार को चलाते हैं। मौसम के अनुसार कभी कभी व्यवसाय बदल भी लेते हैं। फिलहाल वह चना बेच रहे हैं। सुनील का लड़का चंदन कुमार राजकीय कृत पब्लिक उच्च विद्यालय रानीगंज इमामगंज में पढ़ता था। वहीं से उसने इंटर का एग्जाम दिया था।
चंदन का कहना है कि वह कम से कम आठ से नौ घंटे तक पढ़ाई करता था। इसी वजह से उसे बेहतर अंक मिले हैं। उसका कहना है कि अपनी मुफलिसि को दूर करने के लिए हमारे पास पढ़ाई के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है। चंदन का सपना है कि ग्रेज्युशेन की पढ़ाई पूरी कर आईएएस की तैयारी करेगा।
चंदन ने बताया कि वह बेहद गरीब घर से ताल्लुक रखता है। इस सफलता के पीछे उसके टीचर कमलेश और अनुज के अलावा माता-पिता का बड़ा हाथ है। चंदन का कहना है कि मां रेखा देवी हाउस वाइफ है। वह घर का सारा काम करने के साथ ही पिता से व्यवसाय जुड़े काम को घर में पूरा करती है। इसके बाद ही पिता इमामगंज बस स्टैंड पर चना बेचते हैं। चंदन की इस सफलताा से इलाके के लोग भी काफी खुश हैं। इलाके के ऊपर नक्सली क्षेत्र होने का बदनुमा दाग को ऐसे ही होनहार लड़के भविष्य में दूर करेंगे



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