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भगवान राम के ननिहाल में स्थित विष्णु मंदिर में पूजा करने से पूरी होती है सारी मनोकामनाएं, जानें इसका इतिहास

जहानाबाद. अगर बात जहानाबाद में पर्यटन की करें तो यहां कई दार्शनिक और ऐतिहासिक स्थल हैं. उन्हीं में से एक जहानाबाद जिले के काको प्रखंड स्थित सूर्य मंदिर है. इस मंदिर को विष्णु मंदिर के नाम से भी जाना जाता है. चूंकि मंदिर के किनारे ही एक विशाल सरोवर है और इस सरोवर से खुदाई के दौरान भगवान विष्णु की प्राचीन मूर्ति निकली थी और उस मूर्ति को इस मंदिर में स्थापित किया गया. जिसके बाद से इस मंदिर को विष्णु मंदिर के नाम से भी जाना जाता है.

इस मंदिर में भगवान विष्णु की प्राचीन मूर्ति के अलावा कई देवी-देवताओं की प्रतिमा है. काको का यह विष्णु मंदिर एक ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व का स्थान है. इस विष्णु मंदिर के किनारे एक विशाल सरोवर है. यहां छठ पूजा में भगवान सूर्य की उपासना श्रद्धालु करते हैं.

राजा दशरथ की पत्नी कैकईका मायके था यह इलाका
विष्णु मंदिर प्रबंधक समिति के अध्यक्ष विनोद कुमार यादव बताते हैं कि काको के इस सूर्य मंदिर की खासियत यह है कि यहां जितने भी श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने आते हैं, उनकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती है. कहा जाता है कि यहां राजा दशरथ की पत्नी रानी कैकई का मायके था और इस गांव का नाम पूर्व में कैकईपुर था. यहां कार्तिक और चैत्र माह में छठ पूजा के दौरान देश भर से श्रद्धालु यहां छठ पूजा करने आते हैं. वे मन्नत मांगते हैं और उनकी सारी मनोकामनाओं को सूर्य भगवान पूर्ण कर देते हैं. छठ पूजा के दौरान यहां कम-से-कम लगभग 70-75 हज़ार की संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है. इस बार भी चैत्र छठ को लेकर तैयारियां की जा रही है. 

हेमकुंडल नामक व्यवसाई ने इस सरोवर का कराया था निर्माण
काको के निवासी राघवेंद्र कुमार बताते है कि यह सूर्य मंदिर अति प्राचीन है. इसके किनारे 52 एकड़ का तालाब है. इस मंदिर में जितनी भी मूर्तियां स्थापित है, वह सभी इसी तालाब से खुदाई के दौरान निकली है. इसलिए यह मंदिर पुरातात्विक महत्व भी रखता है. यह सूर्योपासना का केंद्र है. प्राचीन में कई पुस्तकों में इस क्षेत्र का वर्णन है. जिसमें यह प्राचीन काल से ही धार्मिक आस्था का केंद्र था जो अब भी बरकरार है.
राघवेंद्र बताते हैं कि उनके पूर्वज बताया करते हैं कि यह स्थान रानी कैकई का मायका था और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम भी कुछ क्षण के लिए इस जगह पर आए थे. कई बड़े-बड़े विद्वान बताते हैं और पद्मपुराण में भी जिक्र है कि यहां का हेमकुंडल नामक वैश्य जो व्यवसायी थे उन्होंने इस सरोवर का निर्माण करवाया था. महिला श्रद्धालु बताती हैं कि जो भी इस मंदिर में मन और दिल से पूजा करने आते हैं तो भगवान उनकी सारी मनोकामना पूर्ण कर देते हैं. उनकी भी कई सारी मनोकामनाएं यहां पूर्ण हो चुकी है.

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