सहरसा के बनगांव की रहने वाली लक्ष्मी झा ने दक्षिण अफ्रीका के 19342 फिट ऊंचे माउंट किलिमंजारो पर्वत पर 8 मार्च को तिरंगा फहराकर देश का नाम रोशन किया। दैनिक भास्कर से फोन पर बात करते हुए लक्षमी ने बताया कि 4 मार्च को मुंबई से हवाई मार्ग से दक्षिण अफ्रीका के किलिमंजारो पर्वत के लिए रवाना हुई थी। दक्षिण अफ्रीका पहुंचकर 7 मार्च को 19341ऊंचाई किलिमंजारो पर्वत पर चढ़ने अभियान शुरू किया। 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर अपनी चढ़ाई पूरी कर तिरंगा फहराई। उन्होंने ये भी बताया कि आज शुक्रवार को अपने देश मुंबई पहुंच रही है
बतातें चलें कि पर्वतारोही लक्ष्मी झा स्वर्गीय बिनोद झा की छोटी पुत्री है,और 4 भाई बहन में सबसे छोटी है।और मां का नाम सरिता देवी है जो मूलतः सहरसा जिले के बनगांव की रहने वाली है।इनकी प्रारंभिक शिक्षा मोजेलाल राम मध्य विद्यालय बनगांव में हुई थी और माध्यमिक शिक्षा फूल दाय कन्यां उच्च विद्यालय बनगांव में ही हुई थी।और कॉलेज की शिक्षा सहरसा के रमेश झा महिला महाविद्यालय से प्राप्त की थी।लक्ष्मी झा को बचपन से ही एवरेस्ट पर चढ़ने की तमन्ना थी।ग्रामीण परिवेश में पली बढ़ी लक्ष्मी झा कभी अपने लक्ष्य को लेकर हार नहीं मानी।
जानकारी हो कि लक्ष्मी झा इससे पूर्व भी 9 दिनों के अंदर नेपाल स्थित माउंट एवरेस्ट बेस कैंप और नेपाल में काला पत्थर पर तिरंगा फहराकर देश का नाम रोशन की थी। नेपाल के माउंट एवरेस्ट बेस कैंप पर तिरंगा फहराने वाली बिहार की पहली बेटी बनी थी।
लक्ष्मी झा ने बताया की इस मुकाम तक पहुंचने में भाजपा के पूर्व सांसद आर के सिन्हा का बहुत सहयोग मिला और अभी भी सहयोग मिल रहा है।लेकिन सरकार के तरफ से आज तक कोई सहायता नहीं मिल पा रही है।लक्ष्मी झा का अरमान है कि 2024 में माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराएंगी जिसको लेकर वो तैयारी शुरू कर दी है।बतातें चलें कि लक्ष्मीझा के पिता की मौत 17 साल पहले ही हो चुकी है और मां हाउस वाइफ है।बचपन से ही इनको पर्वतारोही बनने का सपना था।
इन्होंने नेहरू इंस्टीच्यूट उत्तराखंड से ट्रेनिंग ली है।उन्होंने ये भी बताया कि इस मुकाम तक पहुंचने में बहुत कठिनाइयां का सामना करना पड़ा है।सरकार के तरफ से भी कोई मदद अभी तक नहीं मिल सकी।मदद मिली आरा के पूर्व सांसद आर के सिन्हा के द्वारा जो पग पग पर हमको आगे बढ़ाने में उनका बहुत सहयोग मिला और अभी भी सहयोग कर रहे हैं।अभी तक लक्ष्मी झा एवरेस्ट बेस कैंप काला पत्थर एक साथ किया ।केदार कंठा सम्मिट क्या और अभी किलिमंजारो पर चढ़ाई कर आज देश लौट रही है।उनका सपना एवरेस्ट समिट करना है।



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