जेएनएन, नई दिल्ली। पांच अप्रैल रात नौ बजे, यह दिवाली तो नहीं थी लेकिन इस पल का अनुभव दिवाली से कम भी नहीं था। वास्तव में यह 130 करोड़ भारतीयों के संकल्प, समर्पण, समर्थन और सहयोग की दिवाली थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर पूरे देश ने एक साथ मिलकर नौ मिनट की यह दिवाली मनाई।
कोरोना के विरुद्ध युद्ध में सभी भारतीयों से प्रधानमंत्री मोदी ने नौ मिनट तक दीया, मोमबत्ती और टॉर्च की रोशनी के साथ अपनी एकजुटता दिखाने को कहा था। पीएम की अपील का ही असर था कि ठीक नौ बजते ही लोगों ने अपने-अपने घरों की लाइटें बंद कीं और छतों, दरवाजों और बालकनी पर दीया जलाकर खड़े हो गए। हर ओर दीपों की लडि़यां सजी हुई दिख रही थीं।

भले ही अभी कोरोना से लड़ाई लंबी चलने वाली है, लेकिन इन नौ मिनट ने दिखा दिया कि 130 करोड़ भारतीय हर लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं और अपने नेतृत्व के साथ हैं। यह दिवाली इस महामारी के बीच लोगों की सेवा में लगे स्वास्थ्यकर्मियों, पुलिस के जवानों और अन्य आवश्यक सेवाओं से जुड़े लोगों का हौसला बढ़ाने वाली भी रही।
इसने दिखा दिया कि इस लड़ाई में वो अकेले नहीं हैं, पूरा देश उनके साथ खड़ा है। इन दीयों की लड़ी ने दिखा दिया कि अपने-अपने घरों में रहकर लॉकडाउन का पूरी दृढ़ता से पालन कर रहे लोगों का युद्ध भी किसी मामले में कम नहीं है। कोरोना के विरुद्ध इस युद्ध में हर भारतीय का योगदान उल्लेखनीय है।

.. और नहीं गई लाइट
ये नौ मिनट बीतने के साथ ऐसी तमाम आशंकाएं भी हवा हो गई, जिनमें कहा जा रहा था कि एक साथ लाइटें बंद होने और फिर नौ मिनट बाद चालू होने से पड़ने वाले दबाव से ग्रिड फेल हो जाएंगे। सरकार की चाकचौबंद व्यवस्था और लोगों की ओर से केवल लाइटें बंद करने व अन्य इलेक्टि्रक वस्तुओं को यथावत रखने की सतर्कता से ऐसा कुछ नहीं हुआ।
प्रधानमंत्री मोदी की अपील पर 22 मार्च को जनता कर्फ्यू के दिन भी लोगों में यही उत्साह दिखा था। उस दिन मोदी ने शाम पांच बजे पांच मिनट के लिए लोगों से थाली, ताली या घंटी बजाकर कोरोना के खिलाफ लड़ाई में जुटे योद्धाओं के प्रति सम्मान दिखाने की अपील की थी। इस अपील पर ठीक पांच बजे पूरे देश ने एकजुट होकर घंटी, ताली, थाली और शंख की ध्वनि से वातावरण को गुंजायमान कर दिया था।







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