बेगूसराय, 11 फरवरी 2023: क्रिटिकल मरीजों के लिए समय बहुत अहम होता है। उसके साथ ही अत्याधुनिक उपकरणों के साथ उन्नत चिकित्सा सुविधा भी बहुत मायने रखता है। जयप्रभा मेदांता सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, पटना ऐसे मरीजों की इलाज के लिए हमेशा तत्पर रहता है। जिनकी हालत बहुत क्रिटिकल होती है और जिनको हेड इंजरी, ट्रॉमा और स्ट्रोक होता है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद जयप्रभा मेदांता सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, पटना के डिपार्टमेंट ऑफ न्यूरो सर्जरी के डायरेक्टर और एचओडी डॉ. मुकुंद प्रसाद ने बताया कि हेड इंजरी, ट्रॉमा और स्ट्रोक के वक्त इलाज में तत्परता बहुत मायने रखता है। एक मरीज के लिए वह वक्त बहुत अहम होता है। उस वक्त में मरीज का जल्द से जल्द और बेहतर इलाज करना होता है। जयप्रभा मेदांता सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, पटना अपने मरीजों को प्राथमिकता देता है। हमारे यहां उन्नत मशीनों के साथ आधुनिक चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध है। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में जितने भी सर्वाइवर उपस्थित हैं, यह जयप्रभा मेदांता सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल की सफलता और डॉक्टरों की मेहनत को दिखाता है।
बेगूसराय के आईएमए हॉल में जयप्रभा मेदांता सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, पटना की तरफ से हेड इंजरी के अलावा ट्रॉमा और स्ट्रोक के सर्वाइवर मरीजों के विशेष रूप से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जयप्रभा मेदांता सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल पटना के डिपार्टमेंट ऑफ न्यूरो सर्जरी के एसोसिएट कंसलटेंट डॉक्टर मारुति नंदन ने बताया कि जयप्रभा मेदांता सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, पटना में कई ऐसे केस आते हैं, जो क्रिटिकल होते हैं और उन पर तुरंत एक्शन लेना होता है।
उन्होंने बताया कि एक ऐसा ही केस आया था जिसमें मरीज छत से नीचे गिर गया था और उसके सिर में बहुत ज्यादा चोट लगी थी। इसके अलावा एक दूसरा क्रिटिकल केस ऐसा भी आया था, जिसमें एक युवक को ब्रेन हेमरेज हुआ था बिना सर्जरी किये न्यूरो इंटरवेंशनल पद्धति से क्वाइलिंग की गई थी। एक ऐसी महिला का भी केस आया था जो काफी क्रिटिकल था। उनका इलाज जयप्रभा मेदांता सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में हुआ और वह महिला आज की तारीख में स्वस्थ है।
डॉक्टर मारुति नंदन ने बताया कि जो युवक छत पर से गिर गया था, उसे सीवियर हेड इंजरी थी। उसकी हड्डियों को निकाल कर के इलाज किया गया। युवक लंबे वक्त तक आईसीयू में रहा था। वह धीरे-धीरे रिकवर हो गया। डॉक्टर मारुति नंदन ने बताया कि जब सीवियर इंजरी का केस आता है तो इस हालत में इलाज करते वक्त हड्डी को हटा दिया जाता है और जो ब्लड क्लॉट होता है उसको हटाया जाता है ताकि मस्तिष्क का दबाव खत्म हो जाए और वह बेहतर तरीके से काम कर सके। क्योंकि जब इंपैक्ट होता है तो मस्तिष्क के अंदर सूजन भी हो सकता है। उस सूजन को खत्म करने के लिए एक तरफ की हड्डी को हटाना पड़ता है। जब पेशेंट रिकवर हो जाता है और सूजन बाद में कम हो जाता है तो फिर आगे का इलाज किया जाता है।
डाॅक्टर मारुति नंदन ने बताया कि मेदांता सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल पटना में न्यूरो सर्जरी को लेकर सारी अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध है। इस मौके पर हेड इंजरी, ट्रॉमा और स्ट्रोक जैसे एक घातक हालात से लड़कर और जयप्रभा मेदांता सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल पटना की आधुनिक और बेहतर चिकित्सा के बाद नया जीवन जी रहे कई सर्वाइवर भी उपस्थित थे।
हर महीने दूसरे और चैथे सोमवार को ओपीडी।
रिहील क्लिनिक,
नीलम एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड,
पहली मंजिल, काली मंदिर के सामने,
काली स्थान चैक, बेगूसराय- 851101




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