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भाजपा विधायक संजीव झा का निध’न:ABVP से राजनीतिक जीवन की हुई थी शुरुआत, अंतिम दर्शन के लिए उमड़ी भीड़

कोशी में पहली बार कमल खिलाने वाले भारतीय जनता पार्टी के पूर्व विधायक संजीव झा का निधन हृदयगति के रुकने से गुरुवार की देर रात पटना के पारस अस्पताल में हो गया। जानकारी के अनुसार भाजपा विधायक अस्वस्थ चल रहे थे और उनका इलाज सहरसा के एक निजी अस्पताल से चल रहा था। विगत दो दिन से वह बीमार चल रहे थे और गुरुवार को डॉ. बेहतर इलाज के लिए पटना रेफर कर दिया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से राजनीति की हुई थी शुरुआत

पूर्व विधायक संजीव झा कोशी क्षेत्र के जनमानस भाजपा नेता के रूप में लोकप्रिय थे। पूर्व विधायक संजीव झा का राजनीतिक जीवन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से शुरू हुआ था। उनके बाद वे भाजपा के युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष के रूप में चयनित हुए। यहीं नहीं उसके बाद उनका राजनीतिक सफर अनवरत जारी रहा और वर्ष 2024 में मधेपुरा लोकसभा क्षेत्र से भाजपा की ओर से प्रबल दावेदार थे।

2005 में पहली बार बने थे विधायक

पूर्व विधायक संजीव झा वर्ष 2005 में पहली बार कोशी क्षेत्र में कमल खिलाने वाले भाजपा विधायक बने। वर्ष 2005 में जब विधानसभा का चुनाव हुआ तो उन्होंने राजद के शंकर प्रसाद टेकरीवाल को पराजित किया, लेकिन उस वर्ष विधायकों का शपश ग्रहण नहीं हो सका और पुनः विधानसभा का चुनाव हुआ। दूसरी बार हुए चुनाव में भी भाजपा विधायक संजीव झा ने पुनः राजद के शंकर प्रसाद टेकरीवाल को फिर से पराजित कर कोशी क्षेत्र में पहला कमल खिलाया।

नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के थे स्वतंत्र निदेशक

भाजपा विधायक संजीव झा को भारतीय जनता पार्टी ने उनके विश्वास और पार्टी के प्रति जिम्मेदारी को देखते हुए नॉर्दन कॉलफील्ड्स लिमिटेड के स्वतंत्र निदेशक के रूप में प्रतिनियुक्त किया था।

अंतिम दर्शन के लिए समर्थकों की उमड़ी भीड़

अंतिम दर्शन के लिए समर्थकों की उमड़ी भीड़

दादा भी थे लोकप्रिय नेता

पूर्व विधायक संजीव झा के परदादा जयकृष्ण झा भी एक लोकप्रिय सामाजिक छवि के व्यक्ति थे, जबकि संजीव झा के दादा केदार झा भी काफी लोकप्रिय रहे। पूर्व विधायक संजीव झा के पिता रमाशंकर झा सहरसा व्यवहार न्यायालय के एक जानेमाने वकील थे और छः भाइयों में सबसे बड़े थे। छह भाइयों में सबसे बड़ा होने के नाते भी पूर्व विधायक अपने परिवार के सबसे बड़ा बेटा थे और परिवार में बड़ा होने के कारण सम्पूर्ण परिवार को अब तक पूर्व विधायक सबको साथ लेकर चलते रहे। पूर्व विधायक के निधन से गांव में शोक की लहर है। वहीं उनके निधन की सूचना के बाद भाजपा के विधायक सह पूर्व वन पर्यावरण मंत्री नीरज कुमार बबलू सहित अन्य लोगों का आगमन शुरू हो गया है।

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