पढाई के नाम पर सुविधाओं की कमी का हवाला देने वाले उन छात्र-छात्राओं के लिए आमस प्रखंड के बैदा गांव निवासी जाकीर अंसारी की बेटी नासरीन खातून एक सटीक उदाहरण है। जिसने अभावों के बीच पल-बढ़कर सफलता की इबारत लिख दी। और अपने हौसलों के बल पर बैंक में नौकरी हासिल की। वह फ़िलहाल गया के मानपुर स्थित एक्सिस बैंक शाखा में बतौर असिस्टेंट मैनेजर के पद पर है। उसकी इस कामयाबी से परिवार के कष्टों को निपटारा मिला है।n
नासरीन के पिता दूसरे राज्य में रहकर मज़दूरी करते हैं। वह अपनी ईमानदारीपूर्वक मज़दूरी कर पांच बेटियों और एक बेटे को तालीम दिलवा रहे हैं। पिता की हकीकत से वाकिफ सबसे बड़ी बेटी नासरीन ने पिता की मज़दूरी को कभी मजबूरी नहीं बनने दी। बचपन से पढ़ाई में अव्वल रही नासरीन के शौक को देखते हुए पिता ने भी कभी कमी नहीं आने दी। उन्होंने घर के ज़रूरी से ज़रूरी काम को रोककर भी बेटी को उच्च शिक्षा दिलवाया। वह अपने गांव की एकलौती लड़की ह,ै जिसने उच्च शिक्षा हासिल कर बैंक में नौकरी हासिल की है। इस कारण वह गांव की लड़कियों के लिए मिसाल बन गई है।
नौकरी से बदली घर की स्थिति
नासरीन ने क़ामयाबी हासिल कर अपने घर की आर्थिक स्थिति को मजबूत की है। वह अपने खर्चे पर छोटी बहन नाजरीन परवीन को डीएलएड, साबरीन और यासमीन को सरकारी नौकरी की तैयारी करवा रही है। जबकि एकलौता भाई शाकिर हुसैन इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल कर प्राइवेट नौकरी कर रहा है। इधर अपनी बेटी की क़ामयाबी पर मां सहिना खातून, चाचा मेहंदी हसन, शमीम अंसारी, भाई मज़हर, इक़बाल और बहन फरहत परवीन बेहद खुश हैं।
अगले लक्ष्य की तैयारी है जारी
अपनी कामयाबी की दास्तान सुनाते हुए नासरीन कहती है कि वर्ष 2010 में गया के मिर्जा ग़ालिब कॉलेज से आईकॉम, फिर 2013 में गया कॉलेज गया से बीकॉम और फिर यहीं से एमकॉम उत्तीर्ण कर बैंकिंग की तैयारी में जुट गई। आईसीआईसीआई बैंक द्वारा आयोजित पीओ की परीक्षा पास कर बेंगलुरु में प्रशिक्षण प्राप्त बैंक जॉइन कर लिया। कुछ वर्षों तक इसमें काम करने के बाद एक्सिस बैंक में असिस्टेंट मैनेजर की पोस्ट हासिल की है। हालांकि वह इससे आगे जाने की तैयारी में भी जुटी हुई है।



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