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पटना में अनाथ बच्चें ने बायोस्कोप को देखा:संग्रहालय सप्ताह में दिखाई गई बिहार की विलुप्त होती धरोहर,

बिहार के कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के अंतर्गत जननायक कर्पूरी ठाकुर स्मृति संग्रहालय में आयोजित संग्रहालय सप्ताह के चौथे दिन बायोस्कोप के माध्यम से वर्तमान पीढ़ी को बिहार की ऐतिहासिक धरोहरों से परिचित कराया गया। इस लुप्तप्राय धरोहर के माध्यम से बिहार की ऐतिहासिक धरोहरों को रोचक संगीत और प्रकाश के माध्यम से आकर्षक रूप में प्रदर्शित किया गया। म्यूजियम में संग्रहालय सप्ताह का आयोजन 24 जनवरी से किया गया है और ये 31 जनवरी तक चलेगा।

बायोस्कोप प्रदर्शनी देखने के लिए किलकारी बिहार बाल भवन पटना राजकीय कन्या मध्य विद्यालय राजभवन- पटना डीएवी पब्लिक स्कूल पटना, संत माइकल इंटरनेशनल स्कूल पटना के छात्र छात्राओं और खिलखिलाहट रेनबो होम पटना के निराश्रित, अनाथ बच्चें आएं। इनके साथ ही अन्य विभागों के पदाधिकारी / कर्मचारी, विश्वविद्यालय के शोधार्थी और शिक्षार्थियों ने बायोस्कोप को देखा, समझा और जाना।

बायोस्कोप प्रदर्शनी देखने के लिए किलकारी की भीड़ लग गई।

बायोस्कोप प्रदर्शनी देखने के लिए किलकारी की भीड़ लग गई।

बायोस्कोप की संचालिका रुपाली राज बताती है कि बायोस्कोप के माध्यम से बच्चों के बीच समय बिताना बहुत अच्छा लगता है। जननायक कर्पूरी ठाकुर स्मृति संग्रहालय, पटना में दीर्घा सहायक के पद पर कार्यरत श्रीमती नीतू तिवारी बताती है कि आज की नई युवा पीढ़ी को बायोस्कोप दिखाने का मुख्य उद्देश्य यह है कि हमारे बिहार में भी बहुत सारी ऐसी ऐतिहासिक धरोहर है जिसके बारे में जानने हेतु बायोस्कोप एक उचित माध्यम है।

बायोस्कोप जो लगभग विलुप्तता के कगार पर है। पुराने समय में मनोरंजन का बहुत बड़ा साधन बायोस्कोप हुआ करता था। फिल्म जगत की पहली शुरुआत बायोस्कोप मशीन से ही हुई थी। वर्तमान समय में इसका स्थान टीवी, कंप्यूटर और मोबाइल इत्यादि ने ले लिया है। प्राचीनता के आधार पर यह कहना सही है कि यह बायोस्कोप भी हमारी धरोहर ही है और आज की वर्तमान युवा पीढ़ी इस ‘बायोस्कोप’ से अनभिज्ञ हैं।

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