सरकार गांव गांव तक लोगो को मुफ्त स्वास्थ्य सुविधा महैया कराने का दावा करती है लेकिन वैशाली के लालगंज में महज 500 रुपये के लिए प्रसव पीड़ित एक महिला की जान चली गई।हद तो यह है कि मरने के बाद परिजनों को शव ले जाने के लिए एम्बुलेंस नहीं मिला, जिसके कारण ऑटो से शव को घर ले जाना पड़ा।
इंसानियत और मानवता को शर्मसार करने वाली यह घटना लालगंज थाना क्षेत्र के वार्ड नंबर 23 की है जहाँ के जगन्नाथ राम की बेटी रंजू को संवेदनहीन समाज की संवेदनहीनता का खामियाजा जान देकर चुकानी पड़ी।दरअसल प्रसव पीड़ा के बाद अचानक तबियत बिगड़ने के बाद महिला को लेकर उसके परिजन सबसे पहले उस महिला चिकित्सक के पास गए जहाँ से उसका इलाज चल रहा था।
लेकिन महिला का ईलाज करने वाली चिकित्सक और उसके कर्मियों ने ईलाज करने से इंकार करते हुए परिजनों को वहां से भगा दिया।गरीबी और अशिक्षा की मार झेल रहा परिवार अपनी बेटी को लेकर रात भर ईलाज के लिए नीजि क्लिनिक में भटकता रहा।कई निजी अस्पताल का चक्कर काटते रहे मगर कोई भर्ती नहीं लिया।काफी गुजारिश करने के बाद एक निजी अस्पताल में भर्ती भी कराया गया मगर वहां भी महिला की जान नहीं बच सकी और प्रसव के लिए गयी महिला ने समुचित इलाज के अभाव में आखिरकार दम तोड़ दिया।
महिला की दर्द भरी दास्तान यहीं खत्म नहीं होती महिला की मौत के बाद उसके शव को घर लाने के लिए जब एम्बुलेंस की तलाश की गई तो एम्बुलेंस भी पैसा के अभाव में नहीं मिल सका।जिसके बाद एक टेम्पू से शव को घर लाया गया।घटना की जानकारी मिलने पर लालगंज नगर पंचायत के पूर्व अध्यक्ष समेत कई प्रतिनिधि महिला के घर पहुंचे जहाँ पूर्व अध्यक्ष नवीन कुमार ने महिला के अंतिम संस्कार के लिए 3000 रुपये की राशि दी।

इसके बाद उसका अंतिम संस्कार किया गया मृतका के चार अबोध बच्चे हैं और पति कर्नाटक रहकर मजदूरी करता है।ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि रंजू की मौत के बाद जो मदद अब उसके परिवार को मिल रहा है वह पैसा किस काम का।सवाल यह भी है।



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