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कोरोना का ओमिक्रॉन बीएफ-7 वैरिएंट:डॉक्टरों ने कहा- कोरोना से भयाक्रांत न हों, बल्कि मास्क लगाएं व पहले की तरह प्रोटोकॉल पालन करें

कई देशों में काेराेना के नए वैरिएंट ओमिक्राॅन बीएफ-7 से लाेगाें के संक्रमित हाेने की खबरों से लाेग सहमे हुए हैं। भारत में भी केंद्र सरकार के साथ राज्य सरकारें किसी भी आपात स्थिति से निबटने के लिए स्वास्थ्य तैयारियों में जुटी हैं। स्वास्थ्य महकमा अलर्ट है। अपने शाहर और जिला मुजफ्फरपुर में भी काेराेना संकट काे देखते हुए तैयारियां जाेर-शाेर से चल रही हैं। इन्हीं तैयारियों के बीच दैनिक भास्कर ने अपने पाठकों और आम लाेगाें काे काेराेना से बचाव की जानकारी देने और जागरूक करने के लिए नामचीन एक्सपर्ट डाॅक्टर्स के साथ अपने कार्यालय में परिचर्चा का आयोजन किया।

परिचर्चा में उन चिकित्सकों ने भाग लिया जाे काेराेना की पहली, दूसरी और तीसरी लहर में फ्रंट वारियर्स रहे। इन्होंने कभी बताैर जिला नाेडल अफसर, कभी एसकेएमसीएच के अधीक्षक ताे कभी सदर अस्पताल के सीनियर डॉक्टर के रूप में सैकड़ों मरीजों की जान बचाई। इन चिकित्सकों ने निजी अस्पताल में दिन-रात एक कर राेगियाें का इलाज किया। उनकी सेवा की। आईएमए के जरिए लाेगाें काे फाेन और वाॅट्सअप पर चिकित्सा सलाह देकर उपचार सुनिश्चित किया।

इन विशेषज्ञों के अनुसार रहन-सहन और मौसम में फर्क के साथ वैक्सीनेशन दर में दूसरे देशों से आगे रहने के कारण अपने यहां काेराेना से भयाक्रांत हाेने की जरूरत नहीं है। लाेगाें काे डरना जरूरी है। डर से तात्पर्य पहली-दूसरी लहर की तरह सावधानी बरतने से है। नियमित रूप से मास्क इस्तेमाल करने से है। और, जहां तक संभव हाे भीड़-भाड़ से बचना चाहिए। इनके मुताबिक, एसकेएमसीएच, सदर अस्पताल और कई पीएचसी आदि में इलाज के इंतजामात मुकम्मल हैं। अनेक बड़े निजी अस्पतालों में भी सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं।

इन सबके बावजूद काेराेना वैक्सीन का दाे डाेज ले चुके लाेगाें काे प्रिकॉशन डाेज ले लेना चाहिए। खासकर 60 वर्ष या इससे अधिक उम्र के लाेगाें काे प्रिकॉशन डाेज अनिवार्य ताैर पर लेना चाहिए। क्याेंकि, यदि अब काेराेना संकट आता भी है, ताे उम्रदराज लाेगाें काे अधिक परेशानी हाे सकती है। इसलिए सरकारी गाइडलाइन यानी काेराेना प्राेटाेकाॅल का पालन जरूरी है। पढ़िए एक्सपर्ट पैनल के सुझाव, उन्हीं के शब्दों में।

काेराेना से बचने के टिप्स : शहर के वरीय चिकित्सकों ने कराया आश्वस्त, कहा- पूरी है तैयारी

नए वैरिएंट के संक्रमण काे लेकर अलर्ट जारी किया गया है। सदर अस्पताल समेत सभी पीएचसी में दवा, बेड और ऑक्सीजन समेत सभी प्रकार के जरूरी उपकरण उपलब्ध हैं। सदर अस्पताल में दस बेड का आइसोलेशन वार्ड खुल चुका है। परीक्षा समिति कार्यालय में 220 बेड का विशेष वार्ड भी दुरुस्त हो रहा है। काेराेना जांच बढ़ाने काे लेकर फिलहाल मुख्यालय से निर्देश नहीं आया है। फिर भी 1600 जांच राेजाना हाे रही है। टीके आते ही फिर कैंप लगा कर लाेगाें काे दिया जाएगा। जिले में 72 लाख लाेगाें काे काेराेना वैक्सीन लग चुकी है। -डाॅ. यूसी शर्मा, सिविल सर्जन

एसकेएमसीएच में 40 बेड रिजर्व किया गया है। सभी बेड पर पाइपलाइन से ऑक्सीजन सप्लाई है। 80 वेंटिलेटर और 15 आईसीयू बेड तैयार है। 600 बेड की तैयारी है। हर बेड पर वेंटिलेटर लगाने की व्यवस्था है। इसकी जरूरत नहीं पड़ेगी। ऑक्सीजन के दाे टैंक में एक 2000 एमटी और दूसरा 1000 एमटी क्षमता का है। पिछले वर्ष 4140 मरीज स्वस्थ हुए। जीनोम सिक्वेंसिंग मशीन इंस्टॉल हाे चुकी है। उपकरण अा गए हैं। डरने जैसी काेई बात नहीं है। -डाॅ. बाबू साहेब झा, अधीक्षक, एसकेएमसीएच

संक्रमण काे लेकर पैनिक नहीं हाें। सतर्क रहें। जाे लाेग वैक्सीन नहीं लिए हैं, उन्हें जरूर ले लेना चाहिए। नए वैरिएंट काे लेकर नेशनल आईएमए भी काफी कंसर्न है। पूरी तरह प्रिकॉशन डाेज जरूरी है। जिस प्रकार जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने आपसी समन्वयन और सक्रियता से बीती लहरों में काम किया, वही अब भी जरूरी है। जिले में वैक्सीनेशन का आंकड़ा 72 लाख से अधिक है। लाेगाें में इम्युनिटी पावर है। नए वैरिएंट का भी असर कम हाेगा। -डाॅ. जीके ठाकुर, रिटायर्ड अधीक्षक, एसकेएमसीएच

बीती तीनों लहरों में 12 साल से कम उम्र के बच्चों में काेराेना संक्रमण न के बराबर रहा। फिर भी सतर्कता हर किसी के लिए जरूरी है। अभी सरकार ने 12 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए वैक्सीन नहीं बनाई है। फिर भी मास्क लगाना हर व्यक्ति काे आवश्यक है। साफ-सफाई के साथ सोशल डिस्टेंसिंग रखें। जब तक हम पीड़ित नहीं हाे जाते हैं, तब तक प्रिकॉशन नहीं लेते हैं। नहीं ताे संक्रमण तेजी से फैलता है। सतर्कता से बचाव संभव है। -डाॅ. ब्रजमाेहन, वरीय शिशु राेग विशेषज्ञ

काेराेना के नए वैरिएंट काे लेकर अभी पैनिक हाेने की जरूरत नहीं है। सभी काे सतर्क रहना है। पिछले दाे साल तक लाेग काेराेना संक्रमण से काफी जूझे। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की तत्परता से हजारों लाेगाें की जान बच पाई। पुराने अनुभवाें, चिकित्सा महकमे की तैयारी और अपने यहां काेराेना मरीजों के उपचार का बेहतर ट्रैक रिकॉर्ड रहने के कारण नए वैरिएंट आने पर मन में भ्रम की स्थिति नहीं हाेनी चाहिए। -डाॅ. रामजी प्रसाद, वरीय चिकित्सक

संक्रमण भले ही अभी जिले में नहीं है, लेकिन फिर भी हमें अभी से डरने की जरूरत है। जब तक हमारे मन में बीमारी के प्रति के प्रति डर नहीं हाेगा, तब तक हम बचाव के प्रति इंतजाम नहीं करते हैं। डरेंगे, तभी प्रिकॉशन लेंगे। डर का मतलब यह नहीं है कि हम अपना काम छाेड़ दें। बल्कि, भयाक्रांत नहीं हाेना है। सतर्कता और उचित दूरी-एहतियात के साथ काम करते रहना है। -डाॅ. शैलेंद्र कुमार, सीनि. फिजिशियन, काेराेना नाेडल अफसर, एसकेएमसीएच

बीती लहरों में आपसी समन्वयन से काेराेना से जंग जीते। वैक्सीनेशन काे चुनौती के रूप में लिया गया। इससे लाेगाें में इम्युनिटी पावर काफी बढ़ा है। नए वैरिएंट का संक्रमण हाेने पर भी मोर्टेलिटी रेट काफी कम या नगण्य रहेगी। 9 मई 2020 काे जिले में पहला काेराेना संक्रमित मिला था। उस दिन हड़कंप मच गया। लेकिन, हमने काम किया। नया वैरिएंट आता भी है, ताे इसका प्रकोप काफी कम हाेगा। – डाॅ. सीके दास, सीनि. फिजिशियन

देश में पहले भी कई वैरिएंट पर सफलता पाई है। चाइना में इस वैरिएंट का प्रकोप इसलिए अधिक है, क्यांेकि वहां की वैक्सीन उतनी इफेक्टिव नहीं है। इसलिए चीन की वैक्सीन कई देशों ने लाैटा दी। भारत में बनी वैक्सीन काफी इफेक्टिव है। लेकिन, बुजुर्गों काे शीघ्र बूस्टर डाेज लेना चाहिए। सभी लाेगाें काे मास्क लगाना जरूरी है। यंग लाेग किसी गफलत में न रहें। भीड़-भाड़ से बचना चाहिए। -डाॅ. वी. माेहन, इंटेंसिव केयर एक्सपर्ट

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