बिहार के 2 स्थानों में मिले बर्ड फ्लू के संक्रमण के मामले में शुक्रवार से निरोधात्मक कार्र’वाई शुरू कर दी गई। इसके पूर्व केंद्र सरकार के गाइडलाइन और आदेश मिलने के बाद पशुपालन विभाग की टीम ने जिला प्रशासन के साथ मिलकर कलिंग का कार्य शुरू किया।

इस काम में संक्रमित स्थान के 1 किलोमीटर के दायरे में सभी मुर्गे मुर्गियों को मा’रने के बाद उन्हें द’फनाने की प्रक्रिया की जाती है। पटना के कंकड़बाग के अशोकनगर रोड नंबर 14 के निकट और नालंदा जिला के कतरी सराय के सैदपुर गांव के पोल्ट्री फार्म से कलिंग का कार्य शुरू किया गया। सैदपुर में 2 टीमें लगाई गई हैं। पटना में कलिंग कार्य में वेटनरी डॉक्टरों के साथ जिला पशुपालन पदाधिकारी एवं जिलाधिकारी के द्वारा भेजे गए कर्मचारी भी साथ थे। मुर्गियों को मा’रने और द’फनाने के अलावा उनके संक्रमित दाना पानी को भी न’ष्ट किया जा रहा है। पशु उत्पादन एवं संस्थान के तकनीकी देखरेख में यह काम हो रहा है। आमतौर पर बर्ड फ्लू दिसंबर या जनवरी के ठंडे मौसम में होता है। लेकिन मौसम के उतार-चढ़ाव के कारण मार्च में भी यह बीमारी सबसे पहले कौवे में पाई गई। उसके बाद इन दोनों पर मुर्गियों के स्वाब में भी वायरस पाया गया। विशेषज्ञों का मानना है गर्मी बढ़ने पर इस तरह के वायरस वाली बीमारियों में अपने आप कमी आ जाएगी। वहीं, 10 किलोमीटर के दायरे में सर्विलांस रखा गया है। अन्य कहीं भी बर्ड फ्लू की शि’कायत नहीं है।





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