सीतामढ़ी जिले में तेज रफ्तार का कहर जारी है। इससे निपटने के लिए जिला प्रशासन के द्वारा कोई भरी कवायद नहीं की जा रही है। जिसकी वजह से आए दिन छोटी बड़ी सड़क दुर्घटनाएं होती रही है। पिछले 10 महीनों के सरकारी आंकड़ों की बात करें तो एक जनवरी से 31 अक्टूबर महीने तक 206 सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं। जिसमें 165 लोगों की मौत हुई है। जबकि डेढ़ सौ से अधिक लोग गंभीर रूप से जख्मी है। इसमें कई लोग पूरे शरीर से विकलांग हो चुके हैं। जो कभी सड़क पर चलने लायक भी नहीं है।
एकदूसरे को पीछे करने में होता है हादसा
रफ्तार के रोमांच व एक दूसरे को पीछे छोड़ने की होड के साथ ट्रैफिक नियमों की जानकारी का अभाव ने जिंदगी और मौत के फासले को कम किया है। सोमवार को भी दो पिकअप वैन आपस में ओवरटेक कर रहे थे। इसी दौरान सड़क किनारे जा रहे एक महिला और दो छात्रों को रौंद दिया। जिसमे एक 13वर्षीय छात्रा की मौत हो गई। विकास के लिए सड़कों का जाल बिछा दिया गया। मगर, सड़कों पर रोमांच भर रहे वाहन चालकों को ट्रैफिक नियमों के पालन कराने के लिए कोई व्यवस्था नही की गई। सड़कों पर ट्रैफिक सिग्नल और ट्रैफिक साइन बोर्ड नही रहने के कारण हादसों में लगातार वृद्धि हो रही है।
क्या कहते हैं अधिकारी
इस संबंध में एमवीआई एसएन मिश्र ने बताया कि सड़क हादसों की घटनाओं में कमी लाने के लिए लगातार सड़क सुरक्षा के तहत कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को जागरुक किया जा रहा है। पिछले दिनों विभाग हादसों वाले जगहों को ब्लैक स्पॉट के रूप में चिह्नित कर चुका। जहां गति सीमा निर्धारित करने की तैयारी चल रही है। जल्द ही ओवरस्पीड वाहनों की गति की जांच के लिए स्पीड गन उपलब्ध हो जायेगा।



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