भागलपुर में गंगा का जल शीतल होते ही डॉल्फिन की संख्या में वृद्धि हुई है । 2012 के बाद 2022 में गंगा में डॉल्फिन की संख्या में वृद्धि हुई है। पिछले वर्ष गंगा में 188 डॉल्फिन थी, जो अब बढ़कर 208 हो गयी है ।
सुल्तानगंज से कहलगांव तक 71 किलोमीटर का क्षेत्र विक्रमशिला गंगेटिक डॉल्फिन अभ्यारण्य घोषित है। 71 किलोमीटर के दायरे में पिछले वर्ष किए गए सर्वे में डॉल्फिनों की संख्या 188 थी जो अब बढ़कर 208 पर पहुंच चुकी है। यह सर्वे वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन ट्रस्ट की टीम ने जनवरी से लेकर जून तक किया था। इससे पहले 2012 में अभयारण्य क्षेत्र में डॉल्फिनों की संख्या में बढ़त देखी गई थी। 2018 की बात करें तो यह संख्या 171 के करीब थी जो अब 208 पर पहुंच चुकी है। यह भागलपुर के लिए गौरवपूर्ण तो है ही साथ ही साथ पर्यावरण के लिए भी शुभ संकेत है।

डॉलफिन के कार्फ़ ज्यादा देखे गए हैं।
वन विभाग डॉल्फिन का करती है संरक्षण
वन विभाग डॉल्फिन का संरक्षण करती है। विक्रमशिला गंगेटिक डॉल्फिन सेंच्युरी में अवैध रूप से जाल लगाने वालों पर भी नकेल कसी जा रही है । लेकिन अभी भी लोग चोरी-छिपे जाल लगाते हैं। इससे डॉल्फिन के प्रवास पर खतरा बना रहता है । बावजूद इसके डॉलफिन यहां लगातार अठखेलियां करते नजर आते हैं। अगर जाल लगाने पर पाबंदी पूरी तरह से हो तो डॉल्फिनों के लिए यह क्षेत्र और भी अनुकूल होगा साथ ही प्रजनन दर में भी वृद्धि देखी जा सकेगी।
इस बार सबसे अधिक कार्फ़ (डॉल्फिन का बच्चा) देखा गया
वन विभाग के वन्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ संजीत कुमार ने बताया कि वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन ट्रस्ट के द्वारा लगातार 20 साल से सर्वे किया जा रहा है। इस वर्ष के सर्वे में 208 की संख्या देखी गई पिछले वर्ष यह 188 था। डॉलफिन के कार्फ़ ज्यादा देखे गए हैं और यह इसलिए हुआ है क्योंकि 3000 किलोग्राम अवैध जाल सीज किया गया है। सुल्तानगंज से कहलगांव तक इस कारण से नर और मादा डॉल्फिन के लिए मेल सुगम हुआ। इस वजह से संख्या में बढ़ोतरी देखी जा रही है।



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