मोकामा और गोपालगंज में हुए विधानसभा उप चुनाव का रिजल्ट आ चुका है। मोकामा में राजद की उम्मीदवार व जेल में बंद बाहुबली अनंत सिंह की पत्नी नीलम ने देवी जीत गईं। जबकि, भाजपा उम्मीदावार सोनम देवी हार गईं। वहीं, गोपलगंज में राजद के उम्मीदवार मोहन गुप्ता हार गए और भाजपा उम्मीदवार कुसुम देवी जीत गईं। इस उप चुनाव में लोजपा (रामविलास) ने दोनों ही सीटों पर अपने उम्मीदवार नहीं उतारे। भाजपा के प्रति अपना प्रेम दिखाते हुए चिराग पासवान ने पार्टी की तरफ से समर्थन देने का ऐलान किया था।
उपचुनाव के लिए प्रचार-प्रसार की शुरुआत हुई तो लोजपा (रामविलास) की तरफ से दावा किया गया था कि चिराग पासवान की एंट्री के बाद दोनों ही जगहों पर समीकरण बदल जाएगा। दोनों ही सीटों पर चिराग ने भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में चुनाव प्रचार किया था। अब जो रिजल्ट सामने आया, उसके बाद भी पार्टी अपनी बातों पर अड़ी हुई है। पार्टी दावा कर रही है कि चिराग पासवान की वजह से ही गोपालगंज में भाजपा उम्मीदवार की जीत हुई और मोकामा में जीत का अंदर बहुत कम रहा। इस मामले पर रविवार को पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता प्रो. विनित सिंह से बात की गई। कई सवाल उनसे पूछे गए।
क्या बोले प्रवक्ता
सबसे बड़ा सवाल था कि कमी कहां रह गई। मोकामा की सीट हार गए और गोपालगंज हारते-हारते जीत गए? इस पर प्रवक्ता ने कहा कि कमी नहीं रही। हम कहेंगे कि दोनों सीटों पर हमलोग (NDA) की विजय हुई। अब सवाल है कि कैसे? तो इस बारे में बताते हैं। गोपालगंज में भाजपा उम्मीदवार की जीत वोटों से हुई है। लेकिन, मोकामा में हमलोगो की जीत मोरली (मानसिक तौर पर) हुई है। ये इसलिए कह रहे हैं कि 2020 के विधानसभा चुनाव में मोकामा में जीत का अंतर 36 हजार वोटों का था। आज आए उप चुनाव के रिजल्ट में वो अंतर घट कर 16 हजार पर आ गया। यहां पर चिराग पासवान का फैक्टर काम किया है। हां, यहां पर एक बात यह है कि अगर चिराग पासवान मोकामा में 2-3 दिन पहले जाते तो वहां का परिणाम कुछ और होता। भाजपा उम्मीदवार की जीत होती।
वोटों की गोलबंदी हुई
विनित सिंह ने कहा कि गोपालगंज में NDA उम्मीदवार की जीत हुई है। लेकिन, वोटों के बीच का अंतर बहुत कम रह गया है। मुझे लगता है कि 15 साल से सुभाष सिंह वहां पर थे। वहां एंटी कंबेंसी फैक्टर काम किया है। इसके बाद एक विशेष जाति के लोग गोलबंद होकर वहां वोट दिए हैं। उसके बावजूद हमारे गठबंधन के उम्मीदवार ने वहां अपनी सीट निकाली है। वहां भी चिराग पासवान ने सभाएं की थी। वहां उनकी सभा में आई भीड़ परिचायक है कि X फैक्टर बनकर चिराग पासवान उभरे हैं।
देर से चिराग को जोड़ा गया
एक सवाल के जवाब में प्रवक्ता ने कहा कि जब से चुनाव प्रचार की शुरुआत हुई तब से चिराग पासवान को बुलाया जाता तो उसका असर कुछ और ही होता। लेट होने की वजह है कि कुछ बातें थी। जो भाजपा और हमारे बीच चल रही थी। कुछ बातों पर हमें रजामंद होना पड़ता। एक दोनों तरफ से रजामंदी मिल गई। लेकिन, चिराग पासवान मैदान में उतरे।
फिनिशिंग मिलने में थोड़ी सी कमी रह गई। हालांकि, दोनों पार्टियों में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं रही। कुछ लोग कह रहे हैं कि महागठबंधन का सामाजिक जनाधार बढ़ा है। अगर ऐसा होता तो मोकामा पर जीत का अंतर काफी बड़ा होता।
लोजपा (रामविलास) ने दावा किया कि मोकामा में उनकी वजह से 12 हजार पासवान वोटर्स और 4 हजार रविदास वोटर्स के वोट भाजपा उम्मीदवार को मिले हैं। 36 हजार से जो 16 हजार पर जीत का अंतर आया है, वो हमारे कैडर वोट की वजह से ही हुआ है। 20 हजार कैडर वोट पूरी तरह से भाजपा उम्मीदवार को दिए गए। वो भी पूरी तरह से गोलबंद होकर।



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