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फिलीपींस में विश्व की सबसे उंचाई वाली छठ पूजा:पटना की रहने वाली शालिनी ने बनाया रिकॉर्ड, 500 फीट की उंचाई पर बने हेलीपैड पर की सूर्य उपासना

500 फिट की उचांई पर पेंग (नालगे) तूफान का असर काफी तेज था। हवा की रफ्तार से पूजा के सामान उड़ रहे थे। जल की धार तो काफी दूर गिर रही थी। तूफान से चुनौतियां तो बहुत रहीं, लेकिन सूर्य उपासना के महापर्व का संकल्प तूफानों का सीना चीर रहा था। लोक आस्था के महापर्व पर यह नजारा सात समुंदर पार फिलीपींस की राजधानी मनीला का है, जहां पटना की रहने वाली शालिनी ने विश्व की सबसे उंचाई वाली छठ पूजा की है। भारतीय दूतावास की 51 मंजिला इमारत की हैलीपैड पर IFS निशिकांत ने उन्हें अर्घ्य दिलाया। शालिनी का कहना है कि उंचाई से सूर्य की उपासना में चार चांद लग गया। गंगा तो टब में रहीं, भास्कर देव काफी पास लग रहे थे।

6 माह पहले से करनी पड़ती है तैयारी

पटना के अनीसाबाद पुलिस कॉलोनी के रहने वाले आईएफएस निशिकांत फिलीपींस में भारतीय दूतावास में तैनात हैं। वह पत्नी शालिनी के साथ भारतीय दूतावास की बिल्डिंग में रहते हैं। शालिनी और निशिकांत का लोक आस्था के महापर्व से काफी लगाव है। यही कारण है कि वह सात समंदर पार भी सूर्य उपासना के महापर्व पर बिहार की तरह ही विधि विधान से छठ मनाते हैं। राजधानी मनीला के पॉश इलाके में स्थिति भारतीय दूतावास की 51 मंजिली बिल्डिंग में उपर हेलीपैड बना है। सूर्य उपासना के लिए यही स्थान सबसे सुविधाजनक है। निशिकांत ने दैनिक भास्कर से विशेष बातचीत में बताया कि फिलीपींस में छठ पर्व मनाना उनके और शालिनी के लिए काफी गर्व की बात है। बिहार में लोग पर्व नजदीक आने पर तैयारी करते हैं, लेकिन वह इसकी तैयारी काफी समय पहले ही करते हैं। भारत से सूप और डाला के साथ अन्य ऐसे सामानों को मंगाते हैं, जो फिलीपींस में नहीं मिलता है।

शालिनी का कहना है कि उंचाई से सूर्य की उपासना में चार चांद लग गया। गंगा तो टब में रहीं, भास्कर देव काफी पास लग रहे थे।

शालिनी का कहना है कि उंचाई से सूर्य की उपासना में चार चांद लग गया। गंगा तो टब में रहीं, भास्कर देव काफी पास लग रहे थे।

भारत से ढाई घंटे बाद उपासना

आईएफएस अफसर निशिकांत बताते हैं कि भारतीय दूतावास की 51 मंजिला इमारत के हेलीपैड पर व्यवस्था बनाई गई थी। यहां से ही दोनो पहर सूर्य को अर्घ्य दिया गया। शालिनी और निशिकांत ने काफी विधि विधान से छठ मैया का पूजन किया। हेलीपैड पर ही पूजन की सामग्री को सजाकर रखा गया, छठ के लोकगीत से ऐसा लग रहा था कि वह बिहार की धरती पर हैं। भारतीय समय से लगभग ढाई घंटे बाद फिलीपींस में सूर्यास्त और सूर्योदय हुआ। भारत से मंगाए गंगाजल को टब में भरे पानी में मिलाकर शालिनी हाथ में पूजा की थाल लिए भगवान भास्कर के अस्त होने की प्रतीक्षा कीं, जब सूर्य देव अस्त की तरफ बढ़ने लगे तो निशिकांत ने उन्हें अर्घ्य दिलाया। इसी तरह से सोमवार की सुबह निर्जला व्रत रखी शालिनी भगवान भास्कर की प्रतीक्षा में हेलीपैड पर गंगाजल वाले टब में पूजा की सामग्री लेकर खड़ी हो गईं। काफी प्रतीक्षा के बाद जब भगवान भास्कर लालिमा लिए उदय हुए तो निशिकात ने अर्घ्य दिलाया। इस दौरान लोकगीतों की छटा बनी रही जिससे पूजा में बिहार का फील आता रहा।

फिलीपींस में तूफान की बड़ी चुनौती

आईएफएस अफसर निशिकांत का कहना है कि इस बार तूफान चुनौती के रुप में था। खरना का प्रसाद तो घर में बन गया लेकिन अर्घ्य तो 51 मंजिला इमाात पर बने हेलीपैड पर ही देना था। इस वर्ष छठ में तूफान की चुनौती के बाद भी शालिनी की आस्था नहीं डगमगाई। फिलीपींस की राजधानी मनीला में आंधी पेंग (नालगे) का बड़ा असर रहा। इस कारण से रविवार और सोमवार को 40 किलो मीटर प्रति घंटे से भी तेज रफ्तार से हवाएं चल रही थीं। काफी उंचाई और उसपर तूफान के प्रभावी असर के कारण परिस्थितियां काफी विषम हो गई थी। इसके बाद भी निशिकांत और शालिनी ने छठ पूरे उल्लास के साथ मनाने का संकल्प लिया और इसे तूफानी हवाओं की चुनौती के बीच पूरा किया। एक दिन पूर्व आए तूफान का असर इतना था कि अर्घ्य देने में भी मुश्किल हो रही थी। लेकिन आईएफएस अफसर निशिकांत ने शालिनी को काफी हिम्मत दी और सहयोगकर महापर्व की उपासना को पूरा कराया। शालिनी का कहना है कि फिलीपींस की धरती पर कोरोना काल में उनका पहला अर्घ्य था। पहले महापर्व में कोरोना की चुनौती थी और इस बार तूफानी हवा की, लेकिन छठी मैया के आशीर्वाद से उपासना पूरी तरह से सफल हुई।

पटना के अनीसाबाद पुलिस कॉलोनी के रहने वाले आईएफएस निशिकांत और शालिनी का लोक आस्था के महापर्व से काफी लगाव है।

पटना के अनीसाबाद पुलिस कॉलोनी के रहने वाले आईएफएस निशिकांत और शालिनी का लोक आस्था के महापर्व से काफी लगाव है।

परदेस में छठ से हो रहा गर्व

निशिकांत भारतीय दूतावास फिलिपींस में प्रथम सचिव के पद पर तैनात हैं। फिलिपींस में दूसरा छठ मनाने वाले पटना के आईएफएस निशिकांत और उनकी पत्नी शालिनी ने दैनिक भास्कर से विशेष बातचीत में परदेश में देसी त्योहार मनाने की पूरी कहानी सुनाते हुए कहा कि वह काफी गर्व महसूस कर रहे हैं। 2010 बैच के आईएफएस निशिकांत ने बताया कि 24 जून 2020 को उनका ट्रांसफर दिल्ली से फिलिपींस में भारतीय दूतावास में कर दिया गया। कोरोना काल में उन्हें विशेष विमान से फिलिपींस भेजा गया था। फिलिपींस के मनीला शहर में वह रह रहे हैं। पहली बार हालात ऐसे थे कि छठ में भारत आना संभव नहीं था, फिलिपींस में भी पर्व मनाना आसान नहीं था। वहां कभी किसी ने छठ नहीं मनाया था। लेकिन निशिकांत और शालिनी ने ठान लिया था कि छठ तो उन्हें मनाना ही है। दिल्ली से सूप और दउरा मंगाया फिर अपनी बिल्डिंग के प्रशासनिक तंत्र को काफी समझाया इसके बाद छठ करने की अनुमति मिल पाई।

फिलीपींस में दूसरी बार मनाया छठ

इस बार भी वह छठ में बिहार नहीं आ पाए, इस कारण से फिलीपींस में ही लगभग 500 फिट की उचांई पर स्थिति हेलीपैड पर सूर्य उपासना का महापर्व काफी विधि विधान से मनाया। निशिकांत और शालिनी दैनिक भास्कर से टेलीफोन पर हुई बातचीत में काफी उत्साहित दिख रहे थे। उनका कहना है फिलीपींस में डेढ़ लाख भारतीय हैं लेकिन वह पहले भारतीय हैं जिसने लगातार दूसरी बार छठ मनाया है। शालिनी सिंह ने बताया कि वह हाउसवाइफ हैं, क्योंकि फिलीपींस में अफसर की पत्नी को नौकरी की इजाजत नहीं है। शालिनी का कहना है कि छठ मैया ने उनके हाथों इतिहास रचवा दिया। जहां कोई छठ के बारे में जानता नहीं था वहां सूर्य को अर्घ्य देकर इतिहास बना दिया। फिलिपींस की राजधानी मनीला के मकाती सिटी, मेट्रो मनीला में सूर्य उपासना का बड़ा इतिहास बन गया।

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