नेपाल के तराई क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश के कारण गंडक नदी उफान पर है। अब बेतिया के निचले मैदानी एवं दियारा के इलाके में पानी पहुंच चुका है। इसकी वजह से चंपारण तटबंध के उस पार रहने वाले नौतन प्रखंड के शिवराजपुर, भगवानपुर एवं मंगलपुर काला के 13सौ गांवों के सैकड़ों घरों में पानी समा गया है। इससे तीनों पंचायत की करीब दो हजार की आबादी प्रभावित है। शनिवार से लेकर रविवार दोपहर तक मंगलपुर-यादोपुर एवं चंपारण तटबंध पर करीब 500 लोग शरण ले चुके है। लेकिन अब भी सैकड़ों लोग बाढ़ के पानी में फंसे हुए है। सबके घरों में 4-5 फीट पानी समाया हुआ है।

स्थानीय लोग किसी प्रकार नाव का प्रबंध कर उंचे स्थानों पर पहुंच रहे है, लेकिन प्रशासन की ओर से अबतक इन लोगों के लिए गांव से उच्च स्थानों पर ले जाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की जा सकी है। वहीं इधर भगवानपुर के नवकाटोला के ग्रामीणों ने बताया कि भगवानपुर पुरा का पुरा पंचायत बाढ़ की चपेट में है। कही 4-5 फीट पानी है तो कही पानी छप्पर तक पहुंच चुका है। नाव से करीब 50 घरों के करीब 300 लोग गांव छोड़कर चंपारण तटबंध पर पहुंचे हुए है।
वहीं इधर मंगलपुर-यादोपुर मुख्य सड़क के किनारे पहुंचे मंगलपुर काला पंचायत के , दसई माझी परमजीत यादव, धर्मेद्र यादव, जानकी देवी ने बताया कि दस साल पहले बाढ़ की वजह से ही वे लोग भगवानपुर से आकर मंगलपुर काला पंचायत में बस गए। लेकिन यहां भी स्थिति वैसी ही है। भगवानपुर, मंगलपुर काला एवं शिवराजपुर पंचायत के कई गांवों में बाढ़ में फंसे लोगों को नाव से लगातार ढोया जा रहा है। पीड़ितों ने बताया कि नाव की भी क्षमता है। इसलिए जो पहले जरुरी है उसे बाहर निकाला जा रहा है। इसके बाद एक-एक कर सभी लोगों को निकाला जाएगा। अब भी सैकड़ों लोग बाढ़ में फंसे हुए हैं।

हर साल चंपारण तटबंध ही बनता है सहारा
दियारा के बाढ़ पीड़ितों के लिए हर साल चंपारण तटबंध बड़ा सहारा बनता है। एक तो इस तटबंध की वजह से गंडक के बाढ़ का पानी मैदानी भागों में नहीं आता। दूसरा यह कि जब गंडक एवं बारिश के पानी से दियारा के लोग घिर जाते है तो तटबंध ही तीन माह तक के लिए सहारा बनता है। जहां आकर लोग अस्थायी आशियाना बनाकर गुजर बसर करते है। ग्रामीणों ने बताया कि यह तटबंध अगर नहीं होता तो उन्हें कही शरण नहीं मिलता और दियारा के लोगों को और अधिक परेशानी झेलनी पड़ती।

प्रशासन ने चालू किया सामुदायिक किचन
बाढ़ का दंश झेल रहे ग्रामीणों के लिए प्रशासन ने सामुदायिक किचन चालू किया है। वहीं नौतन सीओ भास्कर ने बताया कि चंपारण तटबंध पर सरण लिए बाढ़ पीड़ितों के लिए समुदायिक किचन चलाया जा रहा है। शौचालय पानी बिजली और डॉक्टरों की व्यवस्था किया गया है। पशु चिकित्सक भी वहां उपस्थित है। बाढ़ पीड़ितों को हरसंभव सरकारी स्तर पर मदद की जा रही है।







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