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200 सालों से स्थापित होती मां काली की प्रतिमा:कादी बिगहा गांव में स्थापित की जाती है मूर्ति, अष्टमी को लगती है श्रद्धालुओं की कतार

नालंदा में एक ऐसा मंदिर है जहां अष्टमी के दिन प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं को भभूत दिया जाता है। इसे लेकर श्रद्धालुओं में काफी उत्साह और उमंग देखा जाता है यही कारण है कि लंबी कतारों में लगकर श्रद्धालु महाप्रसाद के रूप में भभूत लेने के लिए मां काली के दरबार में पहुंचते हैं।

नालंदा जिला मुख्यालय बिहार शरीफ से उत्तरी छोर में स्थित करीब 6 किलोमीटर दूर रहुई प्रखंड अंतर्गत कादी बिगहा गांव में पिछले 200 सालों से नवरात्रि के अवसर पर मां काली की प्रतिमा स्थापित की जा रही है जहां अष्टमी के दिन महा प्रसाद के रूप में भभूत देने की परंपरा है।

निसंतान दंपत्ति एवं नौकरी के लिए युवा मांगने आते हैं मन्नत

मंदिर के पुरोहित आचार्य चंदन शर्मा श्याम बिहारी पांडे और सोनू पांडे बताते हैं कि जो भी सच्ची मुराद लेकर मां के दरबार में पहुंचते हैं वे कभी खाली हाथ नहीं लौटते हैं। मां की महिमा ऐसी है कि जिले के लोग तो इस मौके पर इस आयोजन में सम्मिलित होते ही हैं आस पड़ोस के जिले के लोग भी इस मौके पर भभूत लेने के लिए अष्टमी के दिन गांव आते हैं। निसंतान दंपत्ति और नौकरी के लिए युवा यहां आशीर्वाद मांगने आते हैं। जिनकी मनोकामना मां जरूर पूरी करती हैं। जहां सभी पूजा पंडालों में मां के दर्शन के लिए सप्तमी के दिन पट खोला जाता है तो वही कादी बीघा गांव में अष्टमी के दिन मां के दर्शन के लिए पट खोला जाता है।

एक ही मूर्तिकार के वंशज करते आ रहे हैं 200 सालों से प्रतिमा का निर्माण

मां काली की प्रतिमा का निर्माण 200 सालों से एक ही वंशज से जुड़े मूर्तिकार कर रहे हैं। प्रतिमा स्थापित के पूर्व मां को लाने के लिए गांव के हर घर से एक एक सदस्य बिहार शरीफ जाते हैं। इसके बाद बड़े ही धूमधाम से मां की प्रतिमा को लेकर गांव पहुंचते हैं।

मां के बारे में एक और बात प्रचलन में है। ग्रामीणों का कहना है कि नवरात्रि के मौके पर अगर कोई व्यक्ति शराब पीकर मंदिर में आता है तो उसे माँ काली तुरंत दंड भी देती हैं।

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