बिहार में कई दिनों तक मौसम सुहावना रहने के बाद अब बदलाव के आसार नजर आ रहे। अगले तीन-चार दिनों तक प्रदेश के विभिन्न इलाकों में वज्रपात और बारिश होने की संभावना जताई जा रही। वज्रपात को लेकर मौसम विभाग के द्वारा अलर्ट भी जारी किया गया है
वहीं मौसम विभाग के अनुसार शुक्रवार को प्रदेश के कई इलाकों में हल्की और मध्यम बारिश दर्ज की गई। बता दें कि इस वक्त पूर्वी उत्तर प्रदेश में कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। इस कारण बिहार के कई इलाकों में हल्की बारिश हो रही। आपको बता दें कि इस साल राज्य में वज्रपात के कारण 100 से भी अधिक लोगों की जान जा चुकी है। ऐसे में बेहतर यही होगा कि मौसम का हाल देखकर ही अपने घर से बाहर निकलें।
बिहार के 27 जिले में वज्रपात को लेकर अलर्ट जारी
मौसम विभाग के अनुसार शनिवार के दिन राज्य में कई जिलों में वज्रपात को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। पिछले दिन वज्रपात के कारण औरंगाबाद में दो भाइयों की मौत हो गई। मौसम विभाग के द्वारा लगातार लोगों से घरों में रहने की अपील की जा रही है।

मौसम विभाग के अनुसार शुक्रवार को प्रदेश के कई इलाकों में हल्की और मध्यम बारिश की संभावना जताई।
मौसम विभाग के अनुसार आज बिहार के 27 जिलों में अच्छी बारिश होगी। इन जिलों में मेघ गर्जन के साथ वज्रपात की प्रबल संभावना है। इसमें पटना, सीतामढ़ी, शिवहर, मुजफ्फरपुर वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, नालंदा, जहानाबाद, गया, नवादा, शेखपुरा, लखीसराय, बेगूसराय, खगड़िया, मुंगेर, जमुई, सहरसा, सुपौल, अररिया, मधेपुरा, पूर्णिया, किशनगंज, कटिहार, भागलपुर, और बांका शामिल है।
पटना में जारी रहेगा अभी बारिश
बता दें कि पटना मौसम विभाग के अनुसार दिल्ली से लेकर बंगाल की खाड़ी तक मानसून की तरफ लाइन गुजर रही। ऐसे में पटना समिति से जुड़े आसपास के इलाकों में बारिश हो रही है। पटना सहित बिहार के कई जिलों में अभी बारिश का दौर जारी रहने वाला।
कम बारिश होने से धान की खेती में हुआ असर
बता दें कि इस बार बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, में कम बारिश होने से राज्य में धान की खेती काफी मात्रा में प्रभावित हुई है।16 सितंबर तक खड़ी सीजन के दौरान धान का रकबा पिछले वर्ष की तुलना में 18.90 लाख हेक्टेयर कम था।कृषि मंत्रालय के अनुसार 16 सितंबर तक धान का रकबा 399.03 लाख हेक्टेयर था, जो पिछले साल 417.93 लाख हेक्टेयर था।
आपको बता दें कि इस साल राज्य में वज्रपात के कारण 100 से भी अधिक लोगों की जान जा चुकी है। ऐसे में बेहतर यही होगा कि मौसम का हाल देखकर ही अपने घर से बाहर निकलें। मौसम खराब होने की स्थिति में पक्के मकान में आश्रय लें। पेड़, बिजली के खंभे और मोबाइल टावर जैसी सरंचनाओं के पास भूलकर भी न जाएं।







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