शुक्रवार 20 मार्च को एक ओर जहां दिन और रात बराबर होंगे वहीं चंदामामा आम दिनों से बड़े और चमकदार भी दिखेंगे। वैज्ञानिकों के अनुसार चांद 14 फीसदी बड़ा और 12 फीसदी अधिक चमकदार दिखेगा। पिछले साल नासा ने बड़े चांद की तस्वीर भी जारी की थी। यह सब सम दिवा रात्रि यानी इक्वीनोक्स के दिन फिर होगा। इसे स्प्रींग या वर्नल (बसंत) इक्वीनोक्स कहते हैं। हजारीबाग के लिए इक्वीनोक्स खास होता है। पिछले दो दशकों से लोग इक्वीनोक्स का सूर्योदय को देखने पकरी बरवाडीह जाते हैं।
यह शहर बड़कागांव प्रखंड में शहर मुख्यालय से 22 किमी दूर है। इसे शुभाशीष दास ने इक्वीनोक्स प्वाइंटर के रूप में खोजा था। यह देश भर में अनोखा है जहां इक्वीनोक्स का सूर्योदय देखने लोग आते हैं। दक्षिण भारत में नीलूरलु में ऐसे मेगालिथ हैं पर वहां सूर्योदय का नजारा देखने की परंपरा नहीं है।

क्या है खास
पकरी बरवाडीह में दो मेगालिथ सटीक पूर्व में गड़े हुए हैं। आम दिनों में यहां से सूर्य इसके आसपास से उदित होता दिखता है जबकि इक्वीनोक्स के दिन चिह्नित मेगालिथ एम वन और एम टू के बीच बनने वाली वी जैसी आकृति से सीधे उगता हुआ दिखता है। साल में दो बार एक्वीनोक्स होते हैं 20 या 21 मार्च को वर्नल एक्वीनोक्स और 22 या 23 सितंबर को ऑटम एक्वीनोक्स।
गूगल ने एक्वीनोक्स पर बनाया डूडल
क्वीनोक्स की महता बताने के लिए गूगल ने इसबार फिर डूडल बनाया है। पिछले साल से गूगल ने यह शुरुआत की है।पश्चिमी देशों स्प्रींग इक्वीनोक्स बंसत ऋतु के स्वागत का दिन होता है। यह दिन गर्मी की शुरुआत और ठंड की समाप्ति के तौर पर भी जाना जाता है। उपेक्षित है पकरीबरवाडीह: पकरी बरवाडीह पर्यटन विभाग की अनदेखी के कारण उपेक्षित है जबकि दर्जनों बार अधिकारियों ने यहां दौरा किया है। विदेश से भी कई शिक्षाविद यहां पहुंचे हैं




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