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लखीसराय सदर अस्पताल में कुव्यवस्था, बंद थी बिजली आपूर्ति:जनरेटर पर 3 दिन से एसएनसीयू, बंद हुआ तो बच्चों की जान पर बनी

लखीसराय सदर अस्पताल में व्याप्त कुव्यवस्था दूर नहीं हो रही है। इसी का नतीजा है कि पिछले 3 दिनों से एसएनसीयू में बिजली की आपूर्ति तकनीकी कारणों से बंद रहने के बावजूद इसे दूर करने का प्रयास नहीं किया गया। लगातार तीन दिनों से एसएनसीयू का संचालन जनरेटर के भरोसे हो रहा था।null

शुक्रवार की दोपहर जनरेटर भी खराब हो गया। ऐसे में बच्चों की जान पर बन आई और अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। एसएनसीयू में लाइफ सपोर्ट सिस्टम पूरी तरह से बंद हो गया। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन एसएनसीयू वार्ड में भर्ती नवजात को निजी क्लीनिक या सरकारी अस्पताल में ले जाने के लिए परिजनों पर दबाव बनाने लगा।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 5 नवजात के परिजन उनको निजी क्लीनिक और दूसरे जिले लेकर गए। शेष बच्चों को सदर अस्पताल के प्रसव वार्ड के एक कमरे में शिफ्ट किया गया। अस्पताल प्रबंधन के बच्चों को ले जाने की बात कहे जाने पर एसएनसीयू में भर्ती नवजात के कई परिजन रोने लगे और कई जल्द से जल्द एंबुलेंस के सहारे अपने-अपने बच्चों को तुरंत दूसरे स्थान पर शिफ्ट कराने की तैयारी में जुट गए। इस संबंध में अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. राकेश कुमार ने कहा कि बिजली का केबल शाॅर्ट कर जाने की वजह से 2 दिन से बिजली की समस्या थी। लेकिन जनरेटर से संचालन हो रहा था। बिजली पोल से एसएनसीयू वार्ड तक 70 मीटर केबल की जरूरत है। इसके लिए डिमांड की गई थी। इसमें लगभग एक लाख का खर्च है। नवजातों को दूसरे अस्पताल या निजी क्लिनिक नहीं भेजा गया है। 3-4 की गंभीर स्थिति के कारण रेफर किया गया। अन्य का प्रसव कक्ष में इलाज किया जा रहा है। कुछ नवजात के परिजन अपने मन से निजी अस्पताल ले गए हैं।

11 नवजात थे भर्ती
एसएनसीयू वार्ड में 11 नवजात भर्ती थे। एसएनसीयू में भर्ती नवजात शिशुओं में पांच की स्थिति गंभीर थी। सबसे ताज्जुब की बात तो यह है कि नवजात बच्चों में कई के परिजन काफी कमजोर और गरीब तबके के हैं। उनके सामने इनके इलाज की समस्या भी आने लगी है। इन बच्चों के परिजन कैसे इस बोझ को सह पाएंगे यह भी एक अहम सवाल है। रेफर किए गए बच्चों में एक को जमुई, एक को शेखपुरा, एक विद्यापीठ चौक स्थित निजी क्लीनिक और एक थाना चौक स्थित निजी क्लीनिक भेजा गया है। इसके अलावा सूर्यगढ़ा सीएचसी से रेफर होकर आए एक नवजात को भी दूसरे जगह रेफर कर दिया गया।

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