बिहार की लोक गायिका नेहा सिंह राठौर ने केंद्र सरकार को निशाने पर लेते हुए नया पॉलिटिकल सटायर गाया है। नया गीत है – पंद्रह लाख ऐ धनी खतवे में अटकल बा…! नेहा सिंह राठौर उस समय काफी चर्चा में आई थीं जब यूपी विधान सभा चुनाव के समय ‘यूपी में का बा’ गीत गाया था। इसके बाद नेहा ने कई गीत गाए।
नेहा पारंपरिक लोकगीत भी गाती हैं। लेकिन उनकी असली पहचान पॉलिटिकल सटायर गाने की वजह से है। वे इसे खुद से लिखती भी हैं और बिना ज्यादा लटके-झटके के गाती हैं। कभी-कभी एक वाद्य दिखता है। इस बार नेहा ने महंगाई पर व्यंग्य छोड़ा है और केन्द्र सरकार को निशाने पर लिया है।
खाने की चीजों पर जीएसटी का विरोध
नए गीत में नेहा ने दूध, दही, मट्ठा पर जीएसटी लगाने से लेकर चावल और रहर दाल की कीमतों में उछाल पर निशाना साधा है। उन्होंने कॉन्वेंट स्कूलों में लाल, पीले, काले जूतों पर भी व्यंग्य किया है। चीनी, चायपत्ती, जीरा, मरीच, हल्दी की कीमतों पर भी निशाना साधा है और कहा है कि महंगाई ऐसी है कि यह सब उधार में लेना पड़ रहा है।
पंद्रह लाख ऐ धनी खतवे में अटकल बा…! गीत में नेहा सिंह राठौर ने गाया है- आई फलाना के सरकार हो… खरचा करअ कम….बड़ी महंगा बा बाजार खरचा करअ कम… दूध- दही- मट्ठा पे लागल जीएसटी हो.. बोलअ जै-जै चौकीदार हो… खर्चा करअ कम… बड़ी महंगा बा बाजार खरचा करअ कम… रहरी के दाल, चावल अब न पोसाईल रानी…. रहरी के दाल- चावल अब न खिआई रानी… चलअ द माड़ भात आचार रानी खरचा करअ कम….माई के पेंशन धनी खतवे में अटकल बा… कि ओह पर बाबू जी बेमार खरचा करअ कम… आईल फलाने के सरकार खरचा कअल करअ कम… सोमवार के लाल जूता… मंगल के पीयर जूता… जूता, जूता, जूता, जूता केतना किनी हम जूता…कंवेंट स्कूल के व्यापार हो खर्चा करअ कम…. आईल फलाने के सरकार खरचा करअ कम…. चीनी, चायपत्ती, जीरा, मरीच, हरदी हो…ये नोपारी किनली उधार हो.. खरचा करअ कम… बड़ी महंगा बा सरकार खरचा करअ कम….।







Leave a Reply