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बिहार में 4 दिन में 4 मामले:मंत्रिमंडल विस्तार के चार दिन हुए, चार मामलों में विपक्ष ने घेरा

महागठबंधन की सरकार बनते ही BJP पूरी तरह से उसके विरोध में एक्टिव हो गई है। अब BJP के नेता महागठबंधन में शामिल नेताओं की नींव खोदने में जुट गए है। पिछली बार जब महागठबंधन की सरकार बनी थी, तो सुशील मोदी ने प्रेस कांफ्रेस की एक सीरीज चलाई थी। सुशील मोदी तब तक प्रेस कांफ्रेंस करते रहे, जब तक सरकार नही गिर गई। इस बार सुशील मोदी के अलावा दूसरे नेता भी इस महागठबंधन के नेताओं के खिलाफ मोर्चा खोल चुके है।

जिस तरह से महागठबंधन की सरकार में शामिल मंत्रियों पर अपराधिक मामले आ रहे हैं, उसके बाद लालू यादव के दामाद का सरकारी कार्यक्रमों में हिस्सा लेने ने, BJP नेताओं को बैठे बिठाए मुद्दा दे दिया है। अभी मंत्रिमंडल को शपथ लिए चार दिन हुए हैं और अबतक चार मामलों में सरकार घिर चुकी है।

मामला – 1

महागठबंधन की सरकार में मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ, जिसमें 31 मंत्रियों ने शपथ लिया। लेकिन, इन 31 मंत्रियों में से 23 मंत्रियों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं। जबकि 17 मंत्रियों ने अपने खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले घोषित किए हैं। बिहार में नए मंत्रिमंडल में शामिल 72 फीसदी मंत्रियों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के खिलाफ भी मामले दर्ज हैं। अब इसको लेकर भाजपा मुखर हो गई। भाजपा नेता सुशील मोदी ने नीतीश कुमार को आइना दिखाया।

मामला – 2

दूसरा मामला तब आया जब मंत्रिमंडल में शामिल RJD कोटे से मंत्री बने कार्तिक कुमार के खिलाफ एक पूराने मामले में कोर्ट ने उन्हें भगोडा घोषित किया था। उसके बाद बिहार के कानून मंत्री बने कार्तिक कुमार ने वकीलों की एक फौज उतार दी। वकीलों ने कहा – अपहरण के मामले में पुलिस ने 2018 में ही कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट डाल दिया था। कोर्ट ने भी उनपर 1 सितम्बर तक गिरफ्तारी से रोक लगाया है। BJP इस मामले को लेकर बड़ा बवाल कर रही है। कार्तिक जिस जाति समुदाय से आते हैं, BJP ने उसी समाज से नेताओं को खड़ा किया और कहा कि नीतीश कुमार ने इस जाति का अपमान किया है।

मानला – 3

तीसरा मामला लालू यादव के दामाद से जुडा है। राज्यसभा सांसद मीसा भारती के पति शैलेश कुमार अपने साले वन एवं पर्यावरण मंत्री तेजप्रताप यादव के साथ उनके विभाग में पहुंच गए। विभाग में तेजप्रताप से मिलते तो कोई बात होती। लेकिन तेज प्रताप के बहनोई विभाग में पहुंच कर अधिकारियों के साथ बैठक करने लगे। ये कारनाम साले-बहनोई ने प्रदूषण बोर्ड के कार्यालय में किया। BJP इस मामले को लेकर मुखर हो गई।

पूर्व मंत्री जनक राम कहते हैं कि जब वो नीतीश कुमार के कैबिनेट में थे और वो CM के पास कोई फाइल लेकर जाते थे तो नीतीश कुमार झल्लाने लगते थे। अब लालू यादव के दामाद विभाग में जाकर सरकारी अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे हैं तो वो किस हैसियत से बैठक में जा रहे हैं, ये बताएं।

मामला – 4

चौथा मामला शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर से जुड़ा है। दिल्ली के इंदिरा गांधी अन्तरराष्ट्रीय हवाई अड्डा थाना में चंद्रशेखर के विरुद्ध 25 आर्म्स एक्ट और भारतीय दंड विधान 482 के तहत 21 फरवरी 2019 को बैग में छिपाकर जिंदा कारतूस ले जाने के प्रयास का मामला दर्ज हुआ था। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि नीतीश कुमार ने मधेपुरा के विधायक प्रोफेसर चंद्रशेखर के रूप में ऐसे दबंग व्यक्ति को शिक्षा मंत्री बनाया, जो प्वाइंट 315 की दस जिंदा कारतूस बैग में छिपा कर लाने के आरोप में पकड़े गए थे। ऐसे शिक्षा मंत्री क्या सुधार करेंगे और छात्रों को क्या संदेश देंगे?

मोदी ने कहा कि हालांकि माननीय विधायक के भूलवश बैग में कारतूस रख लेने की दलील स्वीकार कर हाईकोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया। लेकिन सवाल है कि क्या कोई भूलवश हवाई यात्रा के बैग में 10 जिंदा कारतूस रख सकता है? उन्होंने कहा कि जब लाइसेंसी रायफल साथ नहीं थी, तब चंद्रशेखर ने इतनी कारतूस क्यों छिपा कर रख ली थी?

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