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पूजा में शराब का सेवन बना मौ’त का कारण!:छपरा में गोरिया बाबा की पूजा में ग्रामीण चढ़ाते शराब

छपरा के मकेर में जहरीली शराब कांड में मरने वालों की संख्या 11 पहुंच गई। सुबह में एक के बाद एक चार और लोगों की मौत हो गई। इसके अलावें चार और गंभीर हालत में है। जिनका इलाज पीएमसीएच में चल रहा है। मौत के कारणों में एक बड़ा कारण गवई पूजा के दौरान प्रसाद के रूप में शराब का सेवन बताया जा रहा। दरअसल, नोनिया टोली में बुधवार को गवई देवता गोरिया बाबा की पूजा सम्पन्न हुई थी।null

पूजा संपन्न होने के बाद प्रसाद के रूप में शराब चढ़ाई गई। जिसका कई लोगों ने सेवन किया। इसके बाद अचानक लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी और बुधवार रात के बाद से देखते देखते 11 लोगों की मौत हो गई।

गवई पूजा के बारे मे जानकारी देते हुए स्थानीय लोगों ने बताया कि यह गांव का पारंपरिक पूजा है। जो सदियों से होता आ रहा। नोनिया समाज में इस पूजा का आयोजन सावन के अंतिम बुधवार को किया जाता। कई जगह इस पूजा को बुधवारी पूजा भी कहा जाता है। सामान्य तौर पर नोनिया समाज मे बंदी सती माता और गोरिया बाबा का एक साथ पूजन किया जाता। दोनों देवी देवता समाज के रक्षक के प्रतीक में माना जाते है। गोरिया बाबा का पूजा घर के आंगन और गांव में किया जाता है। जबकि बंदीसती का घर में बने विशेष पूजन कक्ष में पूजा होता है।

मौत के कारणों में एक बड़ा कारण गवई पूजा के दौरान प्रसाद के रूप में शराब का सेवन बताया जा रहा।

मौत के कारणों में एक बड़ा कारण गवई पूजा के दौरान प्रसाद के रूप में शराब का सेवन बताया जा रहा।

गोरिया बाबा के बारे में मान्यता है कि परिवार और समाज के ऊपर आने वाली किसी भी तरह की परेशानी को रोकने के लिए लोग यह पूजा करते है। नोनिया समाज के लोग गोरिया बाबा का पूजन विशेष विधि से करते हैं।

मकेर के भाथा गांव में दैनिक भास्कर से बात करते हुए महिला लालझरी देवी ने बताया कि पूजन में गेहूं के आटा का लोइयां (गोला) को दो हिस्से में करके उसके ऊपर मिठाई और सिंदूर लगाया जाता। फिर उसे गोरिया बाबा को अर्पित किया जाता। दूसरे चरण में गोरिया बाबा को खुश करने के लिए शराब का भोग लगाया जाता। जिसका सेवन समस्त परिवारजनों द्वारा प्रसाद के रूप में किया जाता।

वहीं दूसरी महिला ने बताया कि जिसके घर में शादी संपन्न हुआ रहता है। उसके घर गोरिया बाबा के विशेष पूजन होता हैं। इसमें मदिरा के साथ मांस भी अर्पित किया जाता। बकरा, मुर्गे का बलि देकर मांस को भी प्रसाद के रूप में बांट कर खाया जाता।

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