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रणवीर सिंह के न्यूड फोटोशूट पर छिड़ी बहस, जानें…

बॉलीवुड स्टार रणवीर सिंह (Ranveer Singh) के खिलाफ मुंबई पुलिस में एफआईआर दर्ज की गई है. एक गैरसरकारी संगठन ने उन पर आरोप लगाया है कि उन्होंने एक पत्रिका के लिए नग्न फोटोशूट करा कर उसकी तस्वीरें साझा की हैं. बॉलीवुड कलाकारों पर इस तरह के आरोप नई बात नहीं है. लेकिन जब भी ऐसा कुछ होता है तो एक बहस शुरू हो जाती है कि आखिर इस तरह के प्रदर्शन की सीमा क्या है? और कब इस तरह का कोई काम अश्लीलता (Obscenity) के दायरे में आ जाता है और अश्लीलता के  बारे में हमारे देश के कानून (Law for obscenity) की क्या स्थिति है.

पहले भी आते रहे हैं ऐसे मामले
भारत में कई बार ऐसे मामले सामने आए हैं, जब बॉलीवुड कलाकारों सहित अन्य लोगों को अश्लील बर्ताव, अश्लील सामग्री और अश्लील भाषा के लिए कानून के दायरे में लाकर उन पर मुकदमा चला है. इससे पहले भी साल 2020 में एक्टर और मॉडल मिलिंद सोमन और पूनम पांडे पर इस तरह के मामले में कार्रवाई हो चुकी है. सोशल मीडिया और इंटरनेट के बाद से इस तरह के कानून और भी सख्त हो गए हैं.

क्या है भारत का कानून
भारत में अश्लीलता संबंधी कार्यों के लिए प्रमुख रूप से भारतीय दंड संहिता की धारा 294 के तहत सजा का प्रावधान है. कोई भी काम अशलीलता के लिहाज से अपराध की श्रेणी में तब आ जाता है, जब वह दूसरों के लिए तकलीफ या परेशानी की वजह बन जाता है. इसी तरह से अश्लील साहित्य को भी धारा 292 के तहत अपराध की श्रेणी में रखा गया है. लेकिन इसके अलावा भी कई और धाराएं अश्लीलता को लेकर बनी हैं.

क्या-क्या धाराएं लगाई गई हैं रणवीर के खिलाफ
लेकिन रणवीर सिंह के खिलाफ कई धाराएं लगाई गई हैं. एनजीओ ने उनके खिलाफ  भारतीय दंड सहिता की धारा 292 के अलावा 293, 509 और सूचना तकनीकी एक्ट की धारा 67 (A) के तहत मामला दर्ज कराया है और जल्द से जल्द उनकी गिरफ्तारी की मांग की है. सूचना तकनीकी एक्ट सोशल मीडिया और इंटरनेट की वजह से बना है. रणवीर के खिलाफ दर्ज मामलों में उन्हें तीन महीने से लेकर सात साल तक की सजा हो सकती है.

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रणवीर सिंह (Ranveer Singh) को इस मामले में 3 महीने से लेकर सात साल तक की सजा हो सकती है.

क्या होगी सीमा या दायरा
इस मामले में धारा 67 अहम है, जिसके मुताबिक कोई भी व्यक्ति अश्लील सामग्री को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में प्रकाशित करता है या प्रसारित करता है तो वह सजा का हकदार होता है. लेकिन एक बड़ा सवाल यही है कि आखिर अश्लीलता की सीमा क्या है? क्या है जो कला के दायरे से निकल कर अश्लीलता के दायरे में आ जाता है और इसका निर्धारण कौन करेगा या कैसे किया जाएगा.

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