मार्च-अप्रैल में लोहा, सीमेंट समेत गृह निर्माण की अन्य सामग्रियों के बढ़े दाम अब कम हो गए, लेकिन बालू की कीमत आसमान पर हाेने से मकान बनाने वाले परेशान हैं। जून के पहले हफ्ते से बालू की कीमत में शुरू हुआ उछाल अभी जारी है। मई के अंत तक 28 रुपए सीएफटी मिलने वाला सोन बालू अब 62-65 रुपए मिल रहा है।
वह भी आसानी से उपलब्ध नहीं है। गंगा बालू की कीमत तो तीन गुनी हो गई है। दो महीने पहले तक 3500 रुपए ट्रक मिलने वाला गंगा बालू अभी 10500 रुपए में मिल रहा है। यही नहीं गंगा में पानी बढ़ने के कारण बालू मिलने में दिक्कत हाे रही है।
दो महीने पहले तक 70-72 रुपए सीएफटी मिलने वाली 5/8 की गिट्टी इन दिनों 110-112 रुपए सीएफटी मिल रही है। कारोबारियों अनुसार राज्य में बालू खनन फिलहाल बंद है। जगह-जगह ओवरलोडिंग के नाम पर चालकों से पैसों की वसूली की जाती है। इसके चलते कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। अभी पटना में कोईलवर के परेव, महाबलीपुर और अरवल से बालू आ रहा है। जबकि गिट्टी गया, रफीगंज और कोडरमा से आ रही है।
ईंट के दाम अभी स्थिर हैं। लेकिन, कोयला की कीमत नहीं कम होने से ईंट के दाम आगे बढ़ सकते हैं। फ्लाई ऐश ईंट 13 हजार में 1500 और मिट्टी वाली पकी ईंट 15-16 हजार में 1500 मिल रही है। अच्छी क्वालिटी का सीमेंट 340 से 430 रुपए तक में मिल रहा है। वहीं छड़ 7200 से 7400 रुपए क्विंटल बिक रहा है। बढ़ी कीमतों का असर सरकारी परियोजना पर भी पड़ रहा है। यही वजह है काम की रफ्तार सुस्त हो गई है।
सीमेंट की कीमत पहले 15 फीसदी तक बढ़ गई थी, अब 10 फीसदी की कमी हुई है। मार्च-अप्रैल में रूस-यूक्रेन युद्ध के समय रॉ मेटेरियल का दाम बढ़ गया था और क्लींकर मेटेरियल नहीं मिल रहा था, कोयले का दाम भी बढ़ गया था। अब रॉ मेटेरियल पर्याप्त मात्रा में मिल रहा है। बरसात को लेकर भी डिमांड कम हाेने लगी है। अंकित चौधरी, सीमेंट कारोबारी
“गिट्टी-बालू महंगा होने के बावजूद समय से नहीं मिल पा रहा है। खनन बंद है और जिन लोगाें ने बालू स्टोर कर रखा है, वे धीरे-धीरे माल निकाल रहे हैं। कीमत मनमानी है। सरकार को इस पर सख्ती से कार्रवाई करनी चाहिए।”
-राकेश बंसल, बिल्डर







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