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मुजफ्फरपुर में कोरोना वा’यरस: जानें क्यों दवा मंडी में उत्पन्न हो गई मास्क और ग्लब्स की कि’ल्लत…

चीन में फैले कोरोना वा’यरस का जिले में अभी तक कोई म’रीज नहीं मिला है। लेकिन, उसका असर दवा बाजार, अस्पताल से लेकर सड़क पर दिखाई दे रहा है। सदर अस्पताल में इसके लिए अलग से वार्ड तैयार किया गया है। वहीं, चिकित्सक मास्क लगाकर म’रीजों का इ’लाज करते व कर्मी भी इसे पहनकर दवा वितरण करते दिखाई दिए। सड़क पर भी अधिकतर लोग मास्क पहनकर ही निकल रहे हैं। बढ़ी मांग के चलते बाजार में भी मास्क व गलब्स का सं’कट बना है।

कच्चे माल की कमी

केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के प्रदेश सचिव दिलीप जलान व पूर्व जिलाध्यक्ष राकेश कुमार ने बताया कि बाजार में मास्क व ग्लब्स जल्दी नहीं मिल रहे हैं। प्रदेश सचिव ने कहा कि दवाओं की कीमत नहीं बढ़ी है और न ही किसी तरह की कमी है। चीन से आने वाले कच्चे माल की कमी से 32 तरह की जरूरी दवाओं को प्रतिबंधित सूची में सरकार ने पहले ही डाल रखा है।एसोसिएशन की ओर से बाजार में कड़ी नजर रखी जा रही है, ताकि कोई भी दवा की कालाबाजारी न हो। बैठक कर जल्द ही आगे की रणनीति बनाई जाएगी। वैसे अखिल भारतीय केमिस्ट व ड्रगिस्ट महासंघ के अध्यक्ष जेएस सिंदे व महासचिव राजीव सिंघल ने मास्क उत्पादकों से कोरोना वा’यरस से ब’चाव के लिए गुणवत्तापूर्ण मास्क उचित दर पर उपलब्ध कराने का आग्रह किया है।चीन से आने वाले कच्चे माल से तैयार होने वाली दवाओं की कीमत में असर दिखने लगा है। बु’खार व पेट संबंधी बी’मारियों की दवाओं की कीमत बढ़ गई है। कई तरह की एंटीबायोटिक व पैरासिटामोल की मूल कीमत में 20 से 35 फीसदी की वृद्धि हुई है। जानकारों की मानें तो जेनरिक दवाओं पर इसका ज्यादा असर है। चीन से एक माह से दवा फैक्ट्रियों में कच्चा माल आना बंद होना बताया जा रहा है। भारत में जो कच्चा माल हैं, वह काफी महंगा हैं।थाईलैंड से माड़ीपुर आने वाले युवती के स्वजनों से डब्ल्यूएचओ के अधिकारियों ने संपर्क किया।

स्वजनों ने बताया कि वह सिंगापुर में रहती है। अभी घर नहीं आई है। एयर होस्टेज का काम कर रही है। सिविल सर्जन डॉ.एसपी सिंह ने बताया कि माड़ीपुर जैतपुर कॉलोनी में युवती के बारे में डब्ल्यूएचओ के एसएमओ डॉ.आनंद गौतम की टीम ने छानबीन की है।पूरी जानकारी विभाग के वरीय अधिकारी को दी गई है। वैसे वह युवती यहां नहीं आई है। स्वजनों को सलाह दी गई है कि अगर वह घर आती है तो इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग को दी जाए। विभागीय अधिकारी है’रान हैं कि जब वह मुजफ्फरपुर आई ही नहीं तो उसका नाम सूची में क्यों शामिल हो गया। उसके पते में पिता या किसी अभिभावक का नाम व मोबाइल नंबर भी नहीं है।

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