ईद उल-अजहा खुशी और शांति का अवसर है, जो लोग अपने परिवारों के साथ मनाते हैं। इस दौरान वे पुरानी शिकायतों को दूर करते हैं और एक दूसरे के साथ बेहतर संबंध बनाते हैं। ईद-उल-अजहा (बकरीद ) के मौके पर रविवार को नालन्दा के जामा मस्जिद, बड़ी दरगाह समेत सभी मस्जीद और ईदगाहों में नमाज अदा की गई। ईद-उल-अजहा एक पवित्र अवसर है, जिसे ‘बलिदान का त्योहार’ भी कहा जाता है. इस पर्व को धू उल-हिज्जाह के 10वें दिन मनाया जाता है। इस मौके पर वह बड़ी दरगाह के गद्दी नशीन पीर साहब ने कहा कि ईद उल अजहा बकरीद की नमाज अच्छे से अदा की गई
सब लोग अमन से रहे एक दूसरे के अंदर कुर्बानी का जज्बा हो । कुर्बानी यह सिखाती है कि हर चीज की कुर्बानी हो जान माल की कुर्बानी हो मुल्क की सलामती के लिए कुर्बानी हो। हर आदमी को एक दूसरे के बारे में अच्छा सोचना होगा। जात धर्म बिरादरी से हटकर लोगों को मुल्क की तरक्की के बारे में सोचना चाहिए । जब हमारा देश तरक्की करेगा तभी हर लोगों का तरक्की होगा।
आज के दिन सूफियों ने यही संदेश दिया था कि जो बेगुनाह का कत्ल करता है वह पूरी दुनिया के इंसानियत का कत्ल करता है । जो भी गलत काम करता है अल्लाह उसी से सबसे ज्यादा नफरत करते है । किसी के मजहब को भला बुरा नहीं कहना चाहिए । हमेशा अपनी भलाई छोड़ सभी लोगों की भलाई के बारे में सोचना चाहिए । बकरीद पर्व को लेकर जिले में सुरक्षा व्यवस्था का जिला प्रशासन के द्वारा व्यापक इंतजाम किए गए हैं मस्जिद,ईदगाहों सहित हर चौक चौराहों पर पुलिस बल की तैनाती की गई है।



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