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लालू प्रसाद का इस समय स्वस्थ रहना क्यों है जरूरी?:तेजस्वी के रहते लालू प्रसाद ही राजद की धुरी

लालू प्रसाद इन दिनों बीमार चल रहे हैं। उनका इलाज दिल्ली एम्स में चल रहा है। लालू प्रसाद का इस समय में स्वस्थ रहना क्यों जरूरी है? यह समझना चाहिए। उनकी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल विधान सभा चुनाव 2020 में सबसे बड़ी पार्टी बनी लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने अपने ही घटक दल वीआईपी के तीन विधायकों को तोड़ अपने साथ ले लिया और राष्ट्रीय जनता दल विधायकों के संख्या बल के हिसाब से दूसरे नंबर पर चली गई। लेकिन जल्दी ही राजद ने तेजी दिखाई और एआईएमआईएम के चार विधायकों को तोड़ अपने साथ कर फिर से सबसे बड़ी पार्टी बन गई। अभी राजद के विधायकों की संख्या 80 पर पहुंच गई है। लालू प्रसाद ने एआईएमआईएम के बागी विधायकों का स्वागत करते हुए कहा था उनकी घर वापसी हुई है। यानी लालू प्रसाद ने एक बार फिर से दिखाया कि वे गेम चेंजर की भूमिका में हैं। जब भी भाजपा और जदयू के रिश्ते खराब होते हैं लोगों को नीतीश कुमार और लालू प्रसाद के बीच दूरियां घटती दिखने लगती हैं। दोनों साथ में सरकार बना भी चुके हैं।

अभिभवाक की भूमिका

लालू प्रसाद, मीसा भारती को फिर से राज्यसभा भेजने के लिए नामांकन भरवाने विधान सभा की सीढ़ियां चढ़ सचिव के कार्यालय तक गए थे। वे राजद उम्मीदवारों की ओर से एमएलसी चुनाव के नामांकन के समय भी विधान सभा गए थे। लालू प्रसाद एक अभिभावक की भूमिका में अभी भी राजद में हैं। हालांकि राजद की विधायक दल की बैठक में तेजस्वी यादव को पार्टी के नीतिगत फैसले लेने का अधिकार दे दिया जा चुका है। लालू प्रसाद अपने परिवार के सदस्यों की महत्वाकांक्षा का बखूबी समझते हैं और कोशिश करते हैं कि सब को जोड़ कर रखें।

लालू प्रसाद, मीसा भारती को फिर से राज्यसभा भेजने के लिए नामांकन भरवाने विधान सभा की सीढ़ियां चढ़ सचिव के कार्यालय तक गए थे।

लालू प्रसाद, मीसा भारती को फिर से राज्यसभा भेजने के लिए नामांकन भरवाने विधान सभा की सीढ़ियां चढ़ सचिव के कार्यालय तक गए थे।

तेजप्रताप यादव को लालू प्रसाद ही संभालते हैं

लालू परिवार के अंदर तेजप्रताप यादव का गुस्सा दिखता रहा है। वे प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह को हिटलर कह चुके हैं। एक युवा नेता ने तो तेज पर इफ्तार के दिन राबड़ी देवी के आवास में कपड़े उतारकर पीटने का आरोप लगाया था। हालांकि उस युवा नेता ने कोई सबूत सामने नहीं किया। तेजप्रताप द्वारा चुनाव में अपनी तरफ से उम्मीदवार उतार कर पार्टी को संकट में डालने का इतिहास भी है। तेजप्रताप यादव में खूबियां हैं तो खामियां भी हैं। उनकी खामियों पर लालू प्रसाद बंदिश लगाते रहे हैं। जब तेजप्रताप यादव ने छात्र जनशक्ति परिषद बनाया और उसका चिह्न हाथ में लालेटन रखा तो लालू प्रसाद के कहने पर उन्होंने संगठन का चिह्न बदला और हाथ में लालटेन की जगह बांसुरी रखा।

साधु- सुभाष से राजद की बदनामी हुई तो उन्हें किनारे किया

लालू यादव के दो सालों साधु यादव और सुभाष यादव की वजह से पार्टी की छवि पर जब असर पड़ने लगा तो लालू प्रसाद ने उन दोनों को अलग किया। हालांकि उसमें देर हुई। दोनों को जब लालू प्रसाद ने किनारे किया तो उसके खतरे भी थे लेकिन उसकी परवाह लालू प्रसाद ने नहीं की। तेजस्वी यादव की शादी के समय साधु यादव का तरह-तरह का बयान लोग भूले नहीं हैं लेकिन इसकी परवाह लालू प्रसाद ने नहीं की। किनारे कर दिया तो कर दिया। तेजस्वी की शादी में भी नहीं बुलाया।

लालू प्रसाद का दरबार जिस तरह से सभी के लिए खुला रहा है वैसा तेजस्वी का नहीं।

लालू प्रसाद का दरबार जिस तरह से सभी के लिए खुला रहा है वैसा तेजस्वी का नहीं।

तेजस्वी को बागडोर लेकिन लालू राजद की धुरी

पार्टी के कई नेता ऐसे हैं जो लालू प्रसाद की वजह से ही पार्टी में बने हुए हैं। एक बार तो प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने सब के सामने कह दिया था कि हू इज तेजप्रताप यादव, मैं सिर्फ लालू प्रसाद यादव को जानता हूं। विवाद होने पर जब-जब जगदानंद सिंह नाराज हुए और पार्टी कार्यालय आना छोड़ दिया तब-तब लालू प्रसाद ने उन्हें अपनी दोस्ती का हवाला देते हुए मना लिया। हालांकि पार्टी में उदय नारायण चौधरी, वृषिण पटेल, श्याम रजक जैसे कई नेता हैं जो लालू प्रसाद के समय ही पार्टी छोड़ गए और वापस पार्टी में आ भी गए। इस सब के बावजूद पार्टी के पुराने नेता सतीश कुमार गुप्ता कहते हैं कि लालू प्रसाद पार्टी की धुरी हैं। तेजस्वी यादव को उन्होंने अपना उत्तराधिकारी बनाया है लेकिन लालू की सलाह राष्ट्रीय जनता दल में सर्वोपरि है। लालू यादव, राजद की सबसे बड़ी ताकत हैं।

तेजस्वी की सर्वश्रेष्ठ पहचान- हम लालू यादव के बेटे हैं

तेजस्वी यादव का अनुभव कई मायने में काफी कम है। उनके पास आंदोलन का इतिहास नहीं है। वे लालू प्रसाद द्वारा घोषित उत्तराधिकारी हैं। यही वजह है कि कई बार उन्हें गांवों में अपनी सर्वश्रेष्ठ पहचान बताने के लिए कहना पड़ता है कि वे लालू यादव के बेटे हैं। तेजस्वी भी जानते हैं कि लालू जन नेता हैं। तेजस्वी को जन नेता बनने में समय लगेगा। तेजस्वी नेता प्रतिपक्ष भले हैं या महागठबंधन की ओर से मुख्यमंत्री पद के दावेदार भले रहे हैं और हैं लेकिन लालू प्रसाद से ही तेजस्वी की ताकत है। यह बात भी है कि तेजस्वी ने लालू प्रसाद की ओर से दी गई जवाबदेहियों को बखूबी निभाया है और कई मौके पर खुद को साबित किया है।

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